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अमृतसर में गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में मॉक ड्रिल, NSG और पंजाब पुलिस के जवान तैनात

Amritsar News : अमृतसर में एनएसजी (NSG) और पंजाब पुलिस के जवानों द्वारा मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है। पहले दुर्गियाना मंदिर में मॉक ड्रिल की गई, इसके बाद जीएनडीयू (GNDU) गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी में जारी है। प्राथमिक जानकारी के आधार पर मीडिया को कवरेज करने से मना किया गया है।

आधी रात अमृतसर में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) कमांडो के अचानक पहुंचने से हलचल मच गई। शहर के कई संवेदनशील इलाकों में पंजाब पुलिस और एनएसजी ने मिलकर बड़े स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित की।

एक ब्लास्ट का सीन क्रिएट किया गया

सबसे पहले, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर एनएसजी की टीम ने एक विस्फोट (ब्लास्ट) का सीन क्रिएट किया और उसके बाद सुरक्षा व्यवस्था की गहन जांच की। इसी तरह देर रात दुर्गियाना मंदिर के बाहरी क्षेत्र में भी इसी प्रकार की मॉक ड्रिल की गई।

पुलिस फिलहाल इस पूरे ऑपरेशन को “मॉक ड्रिल” ही बता रही है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि यह कवायद पूरी तरह गोपनीय रखी गई। अधिकारियों ने इसकी जानकारी पहले से साझा नहीं की।

गुरुनगरी अमृतसर संवेदनशील शहर

सूत्रों के मुताबिक, यह मॉक ड्रिल संभावित आतंकी हमलों या किसी भी आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों का आकलन करने के लिए की जा रही है। हाल के दिनों में बढ़ते खतरे के मद्देनज़र गुरुनगरी अमृतसर को संवेदनशील शहर माना जा रहा है।

मॉक ड्रिल एक अभ्यास है जिसमें आपातकालीन स्थितियों जैसे हवाई हमला, आग या कोई अन्य दुर्घटना के लिए लोगों को प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि वे संकट के समय ठीक से प्रतिक्रिया दे सकें। इसमें सायरन बजाना, ब्लैकआउट (बिजली बंद करना) करना और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने जैसी गतिविधियां शामिल होती हैं। यह अभ्यास सुनिश्चित करता है कि आपात स्थिति में लोग घबराएं नहीं और अपनी और दूसरों की सुरक्षा कर सकें।

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मॉक ड्रिल क्यों महत्वपूर्ण है

यह किसी संगठन या शहर की आपातकालीन योजनाओं की प्रभावशीलता का परीक्षण करने में मदद करता है। इस अभ्यास से लोगों को पता चलता है कि किसी आपात स्थिति में क्या करना है और क्या नहीं करना है। नियमित अभ्यास से लोग किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तत्पर रहते हैं।

मॉक ड्रिल में लोगों को भागने, छिपने, सुरक्षित स्थानों पर जाने और बुनियादी प्राथमिक उपचार जैसी प्रतिक्रियाओं का अभ्यास कराया जाता है। ब्लैकआउट अभ्यास- कभी-कभी, अभ्यास के दौरान कुछ समय के लिए बिजली बंद कर दी जाती है, ताकि लोग अंधेरे में सुरक्षित रहने का तरीका सीख सकें। सायरन और रेडियो संचार की भी टेस्टिंग की जाती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे ठीक से काम कर रहे हैं।

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