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दिल्ली में 800 लोगों के लापता होने की अफवाह का सच: पुलिस ने बताया डर फैलाने वालों का खेल

दिल्ली में लापता लोगों की अफवाह का पूरा सच

पिछले कुछ दिनों से दिल्ली ही नहीं, बल्कि पूरे देश में सोशल मीडिया पर एक ही खबर छाई हुई थी: राजधानी से अचानक 800 से ज्यादा लोग लापता हो गए हैं, जिससे माता-पिता और आम जनता दहशत में आ गई है। बच्चों को स्कूल भेजने से लेकर घर से बाहर निकलने तक, हर जगह डर का माहौल था। हालांकि, अब दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने इन अफवाहों की पूरी सच्चाई उजागर कर दी है और स्पष्ट किया है कि यह डर जानबूझकर फैलाया गया ‘पेड प्रमोशन’ (Paid Promotion) का हिस्सा था।

इन अफवाहों की शुरुआत एक ऐसे आंकड़े से हुई जिसे गलत तरीके से पेश किया गया। सच्चाई यह है कि पिछले महीने (जनवरी 2026) के शुरुआती 15 दिनों में लगभग 800 लोगों के लापता होने की बात कही गई, जबकि यह आंकड़ा पिछले कई सालों से सामान्य रहा है। दिल्ली पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:

1. सामान्य आंकड़ा: पिछले तीन सालों से (जनवरी 2024 से 2026) हर साल जनवरी महीने में औसतन 1700 से 1800 लोग लापता होते रहे हैं। अगर इसका 15 दिन का औसत निकाला जाए, तो यह आंकड़ा लगभग 800 ही बनता है। यानी, यह कोई नई या खतरनाक घटना नहीं है, बल्कि एक सामान्य प्रवृत्ति है जिसे सनसनीखेज बनाया गया।

2. लापता मामलों में कमी: दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि इस साल लापता मामलों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, बल्कि पिछले साल के मुकाबले लगभग 2% की गिरावट दर्ज की गई है। किसी भी संगठित गिरोह (Organized Gang) द्वारा बच्चों या महिलाओं को गायब करने की बात पूरी तरह से झूठी और आधारहीन है।

पुलिस जांच में सामने आया कि इस डर को फैलाने के लिए पेड प्रमोशन का सहारा लिया गया। पैसे देकर जानबूझकर ऐसे वीडियो और रील्स वायरल किए गए, जिनमें डरावनी बातें कहकर लोगों को घबराया गया। इस माहौल का इस्तेमाल कुछ लोगों या संस्थाओं ने अपने फायदे के लिए किया। उदाहरण के लिए, यह अफवाह ठीक उसी समय फैली जब एक मशहूर फिल्म स्टार की नई फिल्म रिलीज हुई थी, जिसकी कहानी भी बच्चों के अपहरण पर आधारित थी। इस वजह से कई लोगों ने इसे फिल्म के प्रचार का हिस्सा माना।

इस अफवाह को मीडिया और राजनीति ने भी हवा दी। कई बड़े समाचार माध्यमों ने बिना पूरी पड़ताल किए इन आंकड़ों को दोहराया, जिससे डर पूरे देश में फैल गया। यहां तक कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी मीडिया में चल रहे 807 लापता लोगों के आंकड़ों का हवाला देते हुए दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए और इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया, जबकि उन्हें भी यह नहीं पता था कि यह एक वार्षिक सामान्य आंकड़ा है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि लोग अक्सर छोटी-छोटी बातों (परीक्षा का डर, माता-पिता से नाराजगी, प्रेम संबंध) पर नाराज होकर घर छोड़ देते हैं और 77% से अधिक मामलों में लापता लोग बाद में मिल जाते हैं।

दिल्ली पुलिस ने अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। नागरिकों से अपील है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हर डरावने कंटेंट पर तुरंत भरोसा न करें और केवल आधिकारिक, विश्वसनीय जानकारी पर ही ध्यान दें, ताकि डर के इस व्यापार को खत्म किया जा सके और समाज ज्यादा सुरक्षित बन सके।

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