Punjab News : पंजाब के मुख्यमंत्री **भगवंत सिंह मान** ने केंद्रीय गृह मंत्री **अमित शाह** से मुलाकात की और हाल ही में आई भयानक **बाढ़ों** के कारण हुए भारी नुकसान को देखते हुए राज्य के लिए **विशेष पैकेज** की माँग की।
मुख्यमंत्री ने अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात की और बाढ़ पीड़ितों को **एस.डी.आर.एफ./एन.डी.आर.एफ. से मुआवजा** दिलाने के लिए **नियमों में संशोधन** की माँग की। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री को बताया कि पंजाब ने दशकों बाद अपनी **सबसे भयानक बाढ़ों** में से एक का सामना किया है, जिससे **2614 गाँवों के 20 लाख से अधिक लोग प्रभावित** हुए हैं और **6.87 लाख लोग बेघर** हो गए हैं।
भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस आपदा ने **व्यापक नुकसान** पहुँचाया है, क्योंकि **4.8 लाख एकड़ से अधिक फ़सलें नष्ट** हो गई हैं, **17,000 से अधिक घर क्षतिग्रस्त** हुए हैं, **2.5 लाख से अधिक पशु प्रभावित** हुए हैं, और **4657 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें, 485 पुल, 1417 पुलिया** और **190 मंडियाँ** बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं।
13,832 करोड़ रूपए के नुकसान का अनुमान
इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि नुकसान का प्रारंभिक अनुमान **13,832 करोड़ रुपये** है, जिसमें कृषि, बुनियादी ढाँचा, स्वास्थ्य, शिक्षा और आजीविका का नुकसान शामिल है। उन्होंने कहा कि मौजूदा **एस.डी.आर.एफ./एन.डी.आर.एफ. मानदंड** नुकसान के वास्तविक पैमाने की पूर्ति के लिए **अपर्याप्त** हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ फ़सलों का नुकसान **33 प्रतिशत और उससे अधिक** है, वहाँ गृह मंत्रालय द्वारा प्रति एकड़ **6800 रुपए** का मुआवजा दिया जाता है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि किसानों को इतना कम मुआवजा देना **सरासर अन्याय** होगा, क्योंकि फ़सलें लगभग तैयार थीं। इसलिए, किसानों को कम से कम **50,000 रुपए प्रति एकड़** का भुगतान किया जाना चाहिए।
सीएम मान ने कहा कि उन्होंने पहले ही मंत्रालय के समक्ष यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने बताया कि अभी तक इसका कोई जवाब नहीं मिला है, इसलिए राज्य ने मुआवजे को बढ़ाने के लिए अपने स्तर पर राज्य बजट से हिस्सा बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुँचाने के लिए राज्य सरकार ने एस.डी.आर.एफ. नियमों के तहत **26 से 33 प्रतिशत फ़सल नुक़सान** के मुआवजे को मौजूदा 2000 रुपए प्रति एकड़ से बढ़ाकर **10,000 रुपए प्रति एकड़**, **33 से 75 प्रतिशत फ़सल नुक़सान** के मुआवजे को मौजूदा 6800 रुपए से बढ़ाकर **10,000 रुपए प्रति एकड़**, और **75 से 100 प्रतिशत फ़सल नुक़सान** के मुआवजे को मौजूदा 6800 रुपए से बढ़ाकर **20,000 रुपए प्रति एकड़** करने का फ़ैसला किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को दिए जाने वाले 20,000 रुपए प्रति एकड़ मुआवजे में राज्य सरकार का योगदान **14,900 रुपए** होगा, जो **पूरे देश में सबसे अधिक** है। उन्होंने कहा कि पूरी तरह से क्षतिग्रस्त/ढह चुके घरों के लिए मुआवजा मौजूदा **1.20 लाख रुपए से दोगुना करके 2.40 लाख रुपए** किया जाना चाहिए। भगवंत सिंह मान ने कहा कि आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घरों (झुग्गी-झोपड़ियों को छोड़कर) के लिए मौजूदा 6500 रुपए से बढ़ाकर **50,000 रुपए प्रति घर** किया जाना चाहिए, जबकि कच्चे मकानों के लिए मुआवजा मौजूदा 4000 रुपए से बढ़ाकर **10,000 रुपए** किया जाना चाहिए।
पशुओं के बाड़े का मुआवजा बढ़ाया
मुख्यमंत्री ने कहा कि घरों से सटे **पशुओं के बाड़ों** के लिए मौजूदा मुआवजा 3000 रुपए से बढ़ाकर **10,000 रुपए** किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि पंजाब ने इस साल **1988 के बाद अब तक की सबसे भयानक बाढ़ों** का सामना किया है और प्रारंभिक मूल्यांकन के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा के परिणामस्वरूप लगभग **1900 गाँव डूब गए हैं**, जिससे किसानों को भारी परेशानी हुई है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस आपदा का सबसे अधिक नुकसान **किसानों** को उठाना पड़ा है, जिसमें लगभग **चार लाख एकड़ ज़मीन पर फ़सलों का नुकसान** हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरदासपुर, अमृतसर, फाजिल्का, कपूरथला और फ़िरोज़पुर सबसे अधिक प्रभावित ज़िले हैं, इसलिए सावन मंडीकरण सीजन 2025-26 के लिए पंजाब को **विशेष छूट** दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, भारत सरकार प्राथमिकता के आधार पर सावन खरीद सीजन 2025-26 के दौरान **धान की खरीद** के लिए **मानकों में छूट** दे सकता है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है ताकि प्राकृतिक आपदा के कारण हुए भारी नुकसान के अलावा किसानों को किसी अन्य परेशानी का सामना न करना पड़े।
**सीमावर्ती बुनियादी ढांचे को बाढ़ से बचाने** के लिए कार्यों के लिए धन के मुद्दे को उठाते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ऐसी जगहें हैं जहाँ **रावी और सतलुज नदियाँ** कई बार अंतरराष्ट्रीय सीमा को पार करती हैं। उन्होंने कहा कि ये नदियाँ समय के साथ अपना **रास्ता भी बदलती** रहती हैं। पंजाब को नदियों के रास्ता बदलने के कारण **ज़मीनों के नदी में बह जाने** की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी कोशिश कर रही है कि किसानों की ज़मीन और अन्य बुनियादी ढाँचे का न्यूनतम नुकसान हो।
बाढ़ सुरक्षा और आर.डी.एफ. बकाया पर वित्तीय सहायता की मांग
मुख्यमंत्री ने कहा कि हर साल कई जगहों पर बाढ़ सुरक्षा के लिए प्रबंध किए जाते हैं, लेकिन राज्य सरकार के पास **धन की कमी** के कारण अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर बाढ़ से बचाव के लिए आवश्यक धन उपलब्ध कराना संभव नहीं है। उन्होंने गृह मंत्री को अवगत कराया कि **बी.एस.एफ.** के साथ हुई बैठक के दौरान यह बात सामने आई है कि बी.एस.एफ. द्वारा संचालित **सीमा चौकियों** को बाढ़ का ख़तरा है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि सीमावर्ती ज़िलों के उपायुक्तों ने बी.एस.एफ. से एकत्रित परियोजनाओं की सूची प्रदान की है, जिन्हें बाढ़ से **तत्काल सुरक्षा** की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि **175.96 करोड़ रुपए** की एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (**डी.पी.आर.**) कार्यों को लागू करने के लिए धन जारी करने हेतु **सी.डब्ल्यू.सी.** और **एन.डी.एम.ए., नई दिल्ली** को सौंपी गई थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले एक साल के दौरान सी.डब्ल्यू.सी. और एन.डी.एम.ए. के साथ कई बैठकें की हैं। हालाँकि, इनके जवाब की अभी भी प्रतीक्षा की जा रही है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि इसलिए अनुरोध किया जाता है कि कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए आवश्यक धन **जल्द से जल्द जारी** किया जाए।
**आर.डी.एफ. (ग्रामीण विकास शुल्क) और मंडी शुल्क के 11297 करोड़ रुपए के बकाया** के मुद्दे को उठाते हुए, मुख्यमंत्री ने खेद व्यक्त किया कि पंजाब ग्रामीण विकास अधिनियम-1987 की धारा 7 और पंजाब कृषि उपज विपणन अधिनियम-1961 की धारा-23 के तहत भुगतान की स्पष्ट व्यवस्था के बावजूद ग्रामीण विकास शुल्क और मंडी शुल्क का भुगतान राज्य सरकार को **नहीं किया जा रहा है**। उन्होंने कहा कि इस फंड का उद्देश्य कृषि और ग्रामीण बुनियादी ढाँचे को बढ़ावा देना है, जो अंततः ग्रामीण सड़क नेटवर्क, मंडियों के बुनियादी ढाँचे, भंडारण सुविधाओं का विस्तार, भूमि रिकॉर्ड का कम्प्यूटरीकरण, मंडियों का स्वचालन और मशीनीकरण आदि के माध्यम से कृषि के समग्र विकास में योगदान देता है।
भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य सरकार ने **डी.एफ.पी.डी., भारत सरकार** के निर्देशों के अनुसार पंजाब ग्रामीण विकास अधिनियम-1987 में संशोधन किया है, लेकिन डी.एफ.पी.डी. के सभी निर्देशों का पालन करने के बावजूद सावन खरीद सीजन-2021-22 से राज्य सरकार को **आर.डी.एफ. का बकाया हिस्सा नहीं मिला है**।
आरडीएफ भुगतान और आढ़तियों के कमीशन पर तुरंत कार्रवाई की मांग
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन फंडों का भुगतान न होने के कारण राज्य को **गंभीर वित्तीय संकट** का सामना करना पड़ रहा है, जिसका ग्रामीण बुनियादी ढाँचे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास और रखरखाव पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने गृह मंत्री से अपील की कि आर.डी.एफ. और मंडी शुल्क का भुगतान **जल्द से जल्द पंजाब को किया जाए** ताकि बुनियादी ढाँचे के विकास के कार्य को तेज़ किया जा सके। भगवंत सिंह मान ने पंजाब में **आढ़तियों का कमीशन कम करने** का मुद्दा भी उठाया और कहा कि पंजाब में आढ़तियों का कमीशन पंजाब कृषि उत्पाद विपणन अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अनुसार **एम.एस.पी. के 2.5 प्रतिशत** के हिसाब से देय है।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2019-20 के खरीद सीजन से आढ़तियों के कमीशन में कोई बदलाव नहीं किया गया है और वर्तमान समय में यह कमीशन गेहूँ के लिए **46 रुपए/क्विंटल** और धान के लिए **45.88 रुपये/क्विंटल** तक सीमित है। पंजाब कृषि उत्पादन विपणन अधिनियम, 1961 के अनुसार, आढ़तियों को सावन खरीद सीजन-2025-26 के लिए एम.एस.पी. के **2.5 प्रतिशत** अर्थात **59.73 रुपए/क्विंटल** के हिसाब से आढ़तिया कमीशन देय है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि डी.एफ.पी.डी., भारत सरकार ने धान के लिए 45.88 रुपए/क्विंटल की दर से आढ़तिया कमीशन देने की मंजूरी दी है, जिसके कारण **आढ़तियों में बेचैनी** है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा इन मुद्दों के तत्काल समाधान के लिए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, भारत सरकार से अनुरोध किया जा रहा है, लेकिन ये मुद्दे अभी भी लंबित हैं। उन्होंने कहा कि मुद्दे की संवेदनशीलता को देखते हुए, इनके समाधान में देरी से **आढ़तिया समुदाय में बेचैनी या संघर्ष शुरू हो सकता है**, जिससे राज्य में सुचारू खरीद प्रक्रिया में व्यवधान पड़ सकता है। भगवंत सिंह मान ने केंद्रीय गृह मंत्री से अपील की कि आढ़तिया कमीशन की दरों को जल्द **अंतिम रूप देने/संशोधन करने** के लिए निर्देश दिए जाएँ।
चावल ढुलाई और कवर्ड गोदाम निर्माण हेतु पी.ई.जी. स्कीम पर बल
पंजाब से **पी.ई.जी. स्कीम** के तहत **चावल की ढुलाई** और **कवर्ड गोदामों के निर्माण** का मुद्दा उठाते हुए, मुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब की कुल कवर्ड स्टोरेज क्षमता लगभग **180 लाख मीट्रिक टन** है, जिसके मुक़ाबले अब तक लगभग **171 लाख मीट्रिक टन अनाज** (140 लाख मीट्रिक टन चावल और 31 लाख मीट्रिक टन गेहूँ) कवर्ड क्षेत्र में स्टोर किया गया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सावन खरीद सीजन 2025-26 के लिए मिलर्स द्वारा **कस्टम मिल किए गए चावल** की डिलीवरी दिसंबर 2025 में शुरू होगी और **117-120 लाख मीट्रिक टन चावल** 30 जून, 2026 तक **एफ़.सी.आई.** को डिलीवर किए जाने हैं।
भगवंत सिंह मान ने कहा कि अब तक चावल की प्राप्ति के लिए केवल **9 लाख मीट्रिक टन कवर्ड स्पेस** उपलब्ध है। इसके अलावा, पिछले दो महीनों से राज्य से केवल **5 लाख मीट्रिक टन चावल** उठाए जा रहे हैं, जिसके अनुसार दिसंबर 2025 तक केवल 19 लाख मीट्रिक टन चावल के लिए जगह उपलब्ध होगी और 2025-26 के सावन खरीद सीजन के चावल की डिलीवरी को समय पर पूरा करने के लिए जून 2026 तक **100 लाख मीट्रिक टन चावल** के लिए जगह बनाने की आवश्यकता होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जून 2026 तक हर महीने कम से कम **10-12 लाख मीट्रिक टन चावल की ढुलाई** की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति को देखते हुए, पंजाब से जून 2026 तक प्रति माह कम से कम 10-12 लाख मीट्रिक टन चावल की ढुलाई करने का अनुरोध किया जाता है ताकि इस **सीमावर्ती संवेदनशील राज्य** में व्यापक जनहित में 30 जून, 2026 तक सावन खरीद सीजन 2025-26 के चावल की मिलिंग को पूरा किया जा सके।
उन्होंने आगे कहा कि डी.एफ.पी.डी., भारत सरकार ने पंजाब में **10 साल की गारंटी पी.ई.जी. स्कीम** के तहत **कवर्ड गोदाम** बनाने के लिए **60 लाख मीट्रिक टन** की क्षमता को मंजूरी दी है ताकि चरणबद्ध तरीके से **खुले भंडारण को समाप्त** किया जा सके। भगवंत सिंह मान ने कहा कि खुली, प्रतिस्पर्धी और निष्पक्ष टेंडरिंग प्रक्रिया के माध्यम से खोजे जा रहे पी.ई.जी. गोदामों की दरों को स्वीकार किया जा सकता है या वैकल्पिक रूप से मौजूदा स्थिति को उलटने के लिए सी.डब्ल्यू.सी. दरों के अलावा एक व्यवहारिक दर को मानदंड के रूप में निर्धारित किया जा सकता है।
रबी 2025-26 के लिए डी.ए.पी. खाद आपूर्ति सुनिश्चित करने का आग्रह
**रबी सीजन 2025-26** के लिए **डी.ए.पी. (DAP) खाद** के प्रबंध का मुद्दा उठाते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि अनुमानित **35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र** गेहूँ की खेती के तहत होगा, जिसके लिए लगभग **पाँच लाख मीट्रिक टन डी.ए.पी. खाद** की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि इस कठिन समय के दौरान **फ़ॉस्फ़ेट युक्त खादों**, विशेष रूप से डी.ए.पी., की लगातार **कमी** देखी गई है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि डी.ए.पी. गेहूँ, आलू और अन्य रबी फ़सलों के अनुकूल उत्पादन को सुनिश्चित करने के लिए **आवश्यक खाद** है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब ने मौजूदा सावन सीजन के दौरान पहले ही **डी.ए.पी. की कम आपूर्ति** का सामना किया है, जिसमें जुलाई के महीने को छोड़कर वास्तविक डिलीवरी आवंटित मात्रा से कम रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब हर साल एफ़.सी.आई. द्वारा खरीदे गए बफ़र स्टॉक का लगभग **50 प्रतिशत हिस्सा** प्रदान करता है, इसलिए खाद की कम आपूर्ति के कारण गेहूँ के उत्पादन में आने वाली किसी भी कमी का हमारी **राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा पर गहरा प्रभाव** पड़ेगा। इसलिए, भगवंत सिंह मान ने अपील की कि भारत सरकार के खाद विभाग को अगस्त से सितंबर के महीनों के दौरान पंजाब राज्य को डी.ए.पी. और अन्य फ़ॉस्फ़ेट युक्त खादों की **अधिकतम आवंटन और समय पर आपूर्ति** सुनिश्चित करने के लिए **प्राथमिकता के आधार पर निर्देश** दिए जाएँ।
रेलवे ओवर ब्रिज के लिए मंजूरी, केंद्रीय गृह मंत्री से हस्तक्षेप की मांग
मुख्यमंत्री ने लेवल क्रॉसिंग नंबर **62-ए, शेरों डिस्ट्रीब्यूटरी, राजपुरा-बठिंडा लाइन, धूरी, ज़िला संगरूर (पंजाब)** पर प्रस्तावित **रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी)** के लिए **जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग (जी.ए.डी.)** को तत्काल मंजूरी देने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री के हस्तक्षेप की माँग की। उन्होंने कहा कि इस रेलवे ओवर ब्रिज के निर्माण को एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचा परियोजना के रूप में चिह्नित किया गया है, जो न केवल चल रही ट्रैफ़िक समस्याओं को दूर करेगा, बल्कि **सड़क सुरक्षा में भी काफ़ी सुधार** करेगा, वाहनों के प्रवाह को सुगम बनाएगा और पंजाब के इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में संपर्क को मज़बूत करेगा।
इस परियोजना को लागू करने के लिए आवश्यक **54 करोड़ रुपए** की पूरी लागत पूरी तरह से **पंजाब सरकार द्वारा वहन** की जाएगी। भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस समय भारतीय रेलवे द्वारा जनरल अरेंजमेंट ड्राइंग (जी.ए.डी.) की **लंबित मंजूरी** के कारण परियोजना की समय पर प्रगति में **बाधा** आ रही है।
कृषि भूमि बचाने के लिए सीमा बाड़ खिसकाने की मांग
**राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किए बिना** अंतरराष्ट्रीय सीमा पर **कांटेदार तार** को संभव सीमा तक सीमा की ओर **स्थानांतरित** करने में सहायता की माँग करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार शून्य रेखा से **150 मीटर आगे** निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पंजाब में कुछ स्थानों पर सीमा सुरक्षा तार **शून्य रेखा से बहुत दूरी पर** है, जिसके कारण कृषि योग्य भूमि का बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय सीमा और मौजूदा बाड़ के बीच पड़ता है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि इस भूमि पर खेती करने के लिए सीमा तार पार करने वाले किसानों की संख्या भी बहुत अधिक है। इन सभी किसानों को रोज़ाना **भारी कठिनाइयों** का सामना करना पड़ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे **बी.एस.एफ. का कार्यभार भी बढ़ता** है। इसके अलावा, सरकार को इन किसानों को **काफ़ी मुआवजा देना** पड़ता है। इसे ध्यान में रखते हुए, अनुरोध किया जाता है कि बी.एस.एफ. को राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता किए बिना जहाँ भी संभव हो, सीमा बाड़ को **अंतरराष्ट्रीय सीमा की ओर स्थानांतरित करने की संभावना तलाशने** के लिए निर्देश दिए जाएँ। भगवंत सिंह मान ने कहा कि उन्होंने यह मुद्दा पहले ही भारत सरकार के समक्ष उठाया हुआ है, लेकिन यह अभी तक **लंबित** है।
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