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रूस का ‘गुप्त टैंकर’ फ्रांस के निशाने पर: समुद्र में बढ़ा विवाद, जानिए पूरा सच…

France-Russia Tension : फ्रांस और रूस के बीच एक नया विवाद तब खड़ा हो गया जब फ्रांसीसी अधिकारियों ने **अटलांटिक तट** के पास **रूसी तेल टैंकर** के चालक दल के **दो सदस्यों को हिरासत में** ले लिया। फ्रांसीसी राष्ट्रपति **इमैनुएल मैक्रों** ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि यह जहाज़ रूस के उस बेड़े का हिस्सा है, जो **गुप्त रूप से संचालित** होता है और **प्रतिबंधों से बचने** के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

फ्रांस ने दिया सुरक्षा नियमों की अनदेखी का हवाला

फ्रांस के पश्चिमी तट पर स्थित **ब्रेस्ट शहर** के अभियोजक **स्टीफ़न केलेनबर्गर** के अनुसार, हिरासत में लिए गए दोनों लोग ख़ुद को जहाज़ का **कप्तान और मुख्य सहायक** बता रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस जाँच की शुरुआत अटलांटिक समुद्री प्रीफ़ेक्ट द्वारा न्यायिक अधिकारियों को सूचित किए जाने के बाद हुई।

मैक्रों ने आरोप लगाया कि ऐसे पुराने टैंकरों के मालिकों की पहचान स्पष्ट नहीं होती और ये **सुरक्षा नियमों की अनदेखी** करते हैं। उन्होंने कहा कि ये जहाज़ रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते लगाए गए **पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने** के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

जहाज पर लगा था बेनिन का झंडा

इस टैंकर की गतिविधियाँ उस समय **संदिग्ध** मानी गईं जब यह **20 सितंबर** को रूस के **प्रिमोर्स्क तेल टर्मिनल** से रवाना हुआ और डेनमार्क के तट से होता हुआ फ्रांस के **सेंट-नज़ायर बंदरगाह** के पास आकर रुका। समुद्री निगरानी रिपोर्टों के मुताबिक़ जहाज़ पर पश्चिम अफ़्रीकी देश **बेनिन का झंडा** लगा है और यह पहले **“पुष्पा” और “बोराके”** जैसे नामों से भी पहचाना जा चुका है।

एक फ्रांसीसी सैन्य अधिकारी ने पुष्टि की कि नौसेना ने अभियोजकों के कहने पर इस जहाज़ को **रोका** है और उसे वहीं रुकने का निर्देश दिया गया है। जब तक जाँच पूरी नहीं हो जाती, जहाज़ को आगे जाने की **अनुमति नहीं** है।

प्रतिबंधित जहाजों की सूची में है शामिल

कोपेनहेगन में **यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन** के दौरान राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि टैंकर के चालक दल की गतिविधियाँ **बेहद आपत्तिजनक** रही हैं और यह मामला रूस के **छुपे हुए तेल बेड़े** की हक़ीक़त को सामने लाने वाला है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह टैंकर यूरोपीय संघ द्वारा **प्रतिबंधित जहाजों की सूची** में शामिल है।

इस घटना से फ्रांस और रूस के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों में और **तल्खी** आने की आशंका जताई जा रही है।

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