केरल का सबरीमाला मंदिर, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र, आजकल एक बेहद सनसनीखेज खुलासे को लेकर सुर्खियों में है। यह मामला धर्म, राजनीति और सिस्टम पर एक साथ सवाल खड़े करता है। आरोप है कि मंदिर के पवित्र हिस्सों में लगे सोने को ‘मरम्मत’ के नाम पर सुनियोजित तरीके से चुराया गया और उसकी तस्करी की गई।
यह घोटाला उस समय सामने आया जब आरोप लगे कि मंदिर के सोने के प्लेटिंग वाले हिस्सों को हटाया गया और उसकी मात्रा में हेराफेरी की गई। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह किसी एक दिन का काम नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क था जिसने मंदिर की पवित्रता को ढाल बनाकर इस अपराध को अंजाम दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए केरल हाई कोर्ट के आदेश पर स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया गया। SIT की शुरुआती जांच में यह तथ्य सामने आया कि सोने की प्लेटिंग वाले हिस्सों को जानबूझकर हटाया गया, फिर दोबारा लगाया गया ताकि चोरी पर किसी को शक न हो। जांच आगे बढ़ने पर त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (Travancore Devaswom Board) के कई पूर्व सदस्यों और पदाधिकारियों की संदिग्ध भूमिका उजागर हुई, जिसके बाद कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं।
गिरफ्तारियों के साथ ही यह मामला सियासी रंग ले चुका है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है और कुछ बड़े नामों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। यही वजह है कि मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए विपक्ष अब सीबीआई (CBI) जांच की मांग कर रहा है। SIT खुद मान चुकी है कि जितना सोना बरामद हुआ है, उससे कहीं ज्यादा गायब होने की आशंका है। इस पूरे घटनाक्रम ने करोड़ों श्रद्धालुओं के भरोसे को गहरा आघात पहुंचाया है।
सबरीमाला गोल्ड केस आज केरल की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है। उम्मीद है कि जांच जल्द ही निर्णायक मोड़ पर पहुंचेगी और पवित्रता की आड़ में किए गए इस बड़े खेल का पूरा सच सामने आएगा।









