महाराष्ट्र में 15 जनवरी को होने वाले नगर-निकाय चुनावों से पहले सियासी माहौल गर्म है। सीटों की जंग के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया है। इसी गहमागहमी के बीच, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का एक बयान चर्चा का विषय बन गया है। ठाणे में एक रोड शो के दौरान शिंदे ने मतदाताओं से कुछ ऐसा कह दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है।
ठाणे में अपने रोड शो के दौरान, एकनाथ शिंदे ने मतदाताओं से अपील करते हुए साफ शब्दों में कहा कि वोटिंग के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए, वरना विकास कार्यों के लिए फंड (पैसे) देने में गड़बड़ी होगी। उन्होंने स्पष्ट रूप से महायुति (शिंदे गुट की शिवसेना और भाजपा) को वोट देने की अपील करते हुए कहा कि जो लोग ‘धनुष-बाण’ और ‘कमल’ के लिए अपने वोट का सही इस्तेमाल नहीं करेंगे, उनके लिए विकास की राह में रुकावट आ सकती है। शिंदे ने ठाणे शहर के वार्डों के विकास के लिए पैसे की कमी न होने देने का वादा भी किया और कहा कि मतदाता अब ‘विकास, स्थिरता और विश्वास’ को प्राथमिकता देंगे।
शिंदे के इस बयान को विपक्षी दलों ने तुरंत धमकी करार दिया है। कांग्रेस नेता वर्षा गायकवाड़ ने महायुति पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आचार संहिता लागू होने के बावजूद मतदाताओं को डराया-धमकाया जा रहा है और उन पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि मतदान से पहले फर्जी मतदाता जोड़े जा रहे हैं, जिससे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिंदे का यह सीधा और दो-टूक अंदाज मतदाताओं पर असर डाल सकता है। वहीं, ठाणे के लोग इस बयान को लेकर दो हिस्सों में बंटे हैं—कुछ इसे विकास की गारंटी मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे मतदान पर दबाव के रूप में देख रहे हैं।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि शहरी राजनीति की दिशा तय करने वाले इन निकाय चुनावों में मतदाताओं का रुख क्या रहता है। मतदान 15 जनवरी को होगा और नतीजे 16 जनवरी को घोषित किए जाएंगे।
