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महाराष्ट्र में भूचाल! अकोट निकाय चुनाव में BJP और AIMIM ने मिलाया हाथ, बनी ‘अकोट विकास मंच’ सरकार

महाराष्ट्र में भूचाल

राजनीति में कहावत है कि दुश्मन आज, दोस्त कल। लेकिन महाराष्ट्र के अकोला जिले से आई खबर ने इस कहावत को नई परिभाषा दे दी है। यहां की अकोट नगर परिषद में धुर विरोधी माने जाने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने सत्ता के लिए हाथ मिला लिया है। इस अनोखे ‘कॉकटेल’ गठबंधन ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है।

अकोट नगर परिषद के हालिया चुनाव में 33 सीटों पर मतदान हुआ, लेकिन किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल सका। BJP 11 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, मगर बहुमत के लिए 18 सीटों की जरूरत थी। बहुमत जुटाने के लिए BJP ने एक बड़ा राजनीतिक ‘मास्टरस्ट्रोक’ चला, जिसके तहत माया धुले ने मेयर का पद जीतकर ‘अकोट विकास मंच’ का गठन किया। यह गठबंधन अकोला जिला मजिस्ट्रेट के पास पंजीकृत किया गया।

यह ‘अकोट विकास मंच’ कई विपरीत विचारधाराओं वाले दलों का मिश्रण है, जिसमें कुल 25 पार्षद शामिल हैं, जो बहुमत के आंकड़े से काफी अधिक है। इस मंच में सबसे बड़ी हैरानी की बात यह है कि BJP (11 सीटें) के साथ AIMIM (5 सीटें) शामिल है, जो मंच की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी है। अन्य सहयोगी दलों में प्रहार जनशक्ति (3), शिवसेना (उद्धव गुट) (2), शिवसेना (शिंदे गुट) (1), एनसीपी (अजित पवार) (2) और एनसीपी (शरद पवार) (1) शामिल हैं। यह गठजोड़ इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि BJP हिंदुत्व की राजनीति करती है, जबकि AIMIM मुस्लिम हितों की बात करती है। इसके अलावा, शिवसेना और एनसीपी के आपस में लड़ रहे धड़े भी सत्ता के लिए एक छत के नीचे आ गए हैं। इस मंच के अंतर्गत सभी सहयोगी दल BJP के व्हिप का पालन करेंगे।

इस अप्रत्याशित राजनीतिक उलटफेर के कारण विपक्षी खेमा (कांग्रेस और वंचित बहुजन आघाडी) लगभग खाली हो गया है। इस गठबंधन की घोषणा के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। शिवसेना (यूबीटी) ने BJP पर सीधे हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि BJP सत्ता में बने रहने के लिए किसी भी विरोधी के साथ समझौता करने को तैयार है। अकोट की यह स्थानीय राजनीति दिखाती है कि सत्ता हासिल करने के लिए वैचारिक मतभेद कितने आसानी से पीछे छूट जाते हैं, और विरोधी भी तत्काल साझेदार बन सकते हैं।

अकोट की यह कहानी दर्शाती है कि राजनीति में सत्ता की भूख सर्वोपरि होती है, जहां कट्टर विरोधी भी तत्काल दोस्त बन जाते हैं, और यह देखना दिलचस्प होगा कि महाराष्ट्र की भविष्य की राजनीति पर इस ‘कॉकटेल’ गठबंधन का क्या असर होता है।

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