राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में उस समय बड़ा तनाव फैल गया जब दिल्ली नगर निगम (MCD) ने हाई कोर्ट के आदेश पर अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू की। इस प्रशासनिक कार्रवाई को बाधित करने के लिए सोशल मीडिया पर एक झूठा और ‘आतंकी’ व्हाट्सएप मैसेज तेजी से फैलाया गया, जिससे माहौल बेहद गरमा गया। अफवाहों के बीच हुई पत्थरबाजी में पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए।
यह पूरी घटना फैज़ इलाही मस्जिद के पास हुई। MCD ने कोर्ट के निर्देशानुसार लगभग 17 बुलडोजरों की मदद से बारात घर, दुकानें और अन्य गैर-कानूनी निर्माणों को हटाने का काम शुरू किया। यह कार्रवाई कानून के पक्ष में एक स्पष्ट कदम था। हालांकि, जैसे ही बुलडोजरों ने काम शुरू किया, कुछ शरारती तत्वों ने सोशल मीडिया पर यह झूठी खबर फैला दी कि मस्जिद को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
अफवाहों ने पैदा की हिंसा
झूठी अफवाहों के कारण स्थानीय लोग भड़क गए, जिसके परिणामस्वरूप भारी पत्थरबाजी हुई और अफरातफरी मच गई। इस हिंसा को नियंत्रित करने के प्रयास में ड्यूटी पर तैनात पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए। प्रशासन ने बाद में स्पष्ट किया कि मस्जिद पूरी तरह सुरक्षित रही और कार्रवाई केवल उन अवैध ढांचों पर की गई, जिनका कोई कानूनी आधार नहीं था।
प्रशासन ने संभाला मोर्चा
दिल्ली पुलिस और एमसीडी ने बेहद संवेदनशीलता और सावधानी के साथ मोर्चा संभाला। प्रशासन ने हल्के बल का प्रयोग कर स्थिति को जल्द ही नियंत्रण में लिया। प्रशासन ने भड़काने वाले तत्वों की साजिश को नाकाम करते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि कैसे एक ‘आतंकी संदेश’ सिर्फ टेक्स्ट नहीं, बल्कि समाज में तनाव फैलाने का हथियार बन सकता है, जिसे कानून, प्रशासन और जनता की जागरूकता से ही विफल किया जा सकता है।
तुर्कमान गेट की इस घटना ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि नियम सबके लिए बराबर हैं, और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने यह साबित किया कि सच्चाई और न्याय की ताकत किसी भी झूठे संदेश या भड़काऊ अफवाह से कहीं अधिक मजबूत होती है।









