महाराष्ट्र की राजनीति में उठा-पटक जारी है। मुंबई के पास स्थित अंबरनाथ नगर परिषद (Ambernath Municipal Council) में हाल ही में हुए बड़े सियासी बदलाव ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ताकत दोगुनी हो गई है। स्थानीय गठबंधन की खबरों पर सख्त कार्रवाई करते हुए कांग्रेस आलाकमान ने 12 पार्षदों को निलंबित कर दिया था, लेकिन इसके तुरंत बाद इन सभी पार्षदों ने बीजेपी का दामन थाम लिया। यह घटनाक्रम अंबरनाथ की स्थानीय राजनीति को पूरी तरह से बदलने वाला माना जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर बीजेपी के साथ गठबंधन की कोशिशों को लेकर महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाया। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष **हर्षवर्धन सपकाळ** के निर्देश पर, पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में अंबरनाथ ब्लॉक कांग्रेस कमेटी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया। कमेटी अध्यक्ष **प्रदीप पाटिल** और नगर परिषद के सभी निर्वाचित पार्षदों को निलंबित कर दिया गया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केंद्रीय नेतृत्व की अनुशासन नीति का स्पष्ट संदेश था।
हालांकि, कांग्रेस के लिए स्थिति तब और खराब हो गई जब सभी 12 निलंबित पार्षदों ने फौरन बीजेपी जॉइन कर ली। इस कदम से अंबरनाथ में कांग्रेस का प्रभाव लगभग खत्म हो गया है और बीजेपी को भारी राजनीतिक लाभ मिला है। इस पूरे घटनाक्रम में शिंदे गुट (Eknath Shinde faction) पूरी तरह से बाहर हो गया है। दरअसल, बीजेपी ने कांग्रेस के साथ स्थानीय गठबंधन की चाल इसलिए चली थी ताकि शिंदे गुट को अंबरनाथ से दूर किया जा सके, और अब यह रणनीति कामयाब होती दिख रही है।
हालांकि उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पहले स्थानीय स्तर पर संभावित गठबंधन पर नाराजगी व्यक्त की थी, लेकिन अब निलंबित पार्षदों के सीधे भाजपा में शामिल होने से पार्टी की स्थिति और भी मजबूत हो गई है। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अब अंबरनाथ में कांग्रेस का प्रभाव नगण्य हो गया है और अगली राजनीतिक लड़ाई मुख्य रूप से बीजेपी और शिंदे गुट के बीच ही लड़ी जाएगी।
अंबरनाथ में कांग्रेस का सख्त कदम अब बीजेपी के लिए एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ साबित हुआ है। स्थानीय राजनीति में हुए इस बड़े उलटफेर ने स्पष्ट कर दिया है कि अंबरनाथ में अब राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं और बीजेपी का पलड़ा भारी है।









