अंतरराष्ट्रीय कूटनीति इस वक्त अमेरिका की ओर से भारत पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने की प्रस्तावित धमकी के कारण गरमाई हुई है। एक तरफ अमेरिका भारत को अपना करीबी दोस्त बताता है, वहीं दूसरी तरफ ऐसे बयान आ रहे हैं जो सीधे तौर पर दबाव बनाने की कोशिश मालूम पड़ते हैं। हालांकि, इस बार भारत का रुख बिलकुल स्पष्ट है: राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं और किसी भी धमकी के आगे झुकने का सवाल ही नहीं है। यह विवाद अमेरिका में एक प्रस्तावित बिल के सामने आने के बाद शुरू हुआ है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में स्पष्ट किया कि जिस बिल की चर्चा हो रही है, वह अभी सिर्फ प्रस्ताव के स्तर पर है। भारत सरकार इससे जुड़ी हर गतिविधि पर बारीकी से नजर बनाए हुए है। जायसवाल ने दो टूक कहा कि भारत अपने फैसले किसी भी दबाव या धमकी के आधार पर तय नहीं करता। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर भारत की रणनीति को स्पष्ट करते हुए कहा कि 1.4 अरब लोगों की जरूरतों को देखते हुए सस्ती, सुरक्षित और भरोसेमंद ऊर्जा उपलब्ध कराना ही हमारी प्राथमिकता है। भारत अपनी नीतियां वैश्विक बाजार की स्थिति, अंतरराष्ट्रीय हालात और घरेलू जरूरतों को देखकर तय करता है, न कि किसी एक देश की इच्छा पर।
इसी बीच, अमेरिका के कॉमर्स मिनिस्टर हॉवर्ड लुटनिक के एक बयान ने विवाद को और बढ़ा दिया। लुटनिक ने दावा किया था कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील इसलिए पूरी नहीं हो सकी क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप को फोन नहीं किया। भारत ने इस दावे को तुरंत खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय ने साफ तौर पर कहा कि यह दावा तथ्यहीन है। मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल के समय में आठ बार बातचीत हो चुकी है, जिससे यह साफ होता है कि संवाद और संपर्क में कोई कमी नहीं थी।
यह पूरा घटनाक्रम इस बात पर जोर देता है कि अमेरिका टैरिफ की धमकी देकर भारत पर अपनी व्यापारिक शर्तें थोपना चाहता है। लेकिन भारत का स्पष्ट संकेत है कि दोस्ती अपनी जगह है, साझेदारी अपनी जगह है, मगर देश के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। भारत अब दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और आत्मनिर्भर नीति के साथ आगे बढ़ रहा है। धमकी या बयानबाजी से भारत की रणनीति नहीं बदलेगी।
फिलहाल, भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह साफ कर दिया है कि भविष्य में कोई भी बातचीत बराबरी के स्तर पर होगी, न कि दबाव के आधार पर। अमेरिका को भारत की इस स्पष्ट रणनीति को समझना होगा, अन्यथा रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है।









