दिल्लीवासियों के लिए स्वच्छ पेयजल हमेशा एक बड़ी चुनौती रहा है, जिसका मुख्य कारण दशकों पुरानी और जर्जर हो चुकी पाइपलाइनें हैं। लीकेज, मिलावट और दूषित पानी की समस्या अब इतिहास बनने वाली है। राजधानी में पानी के नेटवर्क को आधुनिक बनाने के लिए एक बड़े पैमाने पर ओवरहॉल परियोजना की शुरुआत की जा रही है, जिसका उद्देश्य हर घर को 24 घंटे सुरक्षित और साफ़ पानी सुनिश्चित करना है।
दिल्ली में दशकों पुरानी पानी की पाइपलाइनें बुरी तरह जर्जर हो चुकी हैं, जिसके कारण लीकेज, पानी की ख़राब गुणवत्ता और सप्लाई में रुकावट जैसी समस्याएँ रोज सामने आती हैं। राजधानी में इस समस्या को जड़ से ख़त्म करने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
दिल्ली जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने हाल ही में विधानसभा में घोषणा की है कि लगभग 7000 किलोमीटर लंबी पुरानी पानी की पाइपलाइनें चरणबद्ध तरीके से बदली जाएंगी। ये पाइपलाइनें मुख्य रूप से 30 साल से अधिक पुरानी हैं, जिनके कारण जल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित होती रही है।
इस बड़े ओवरहाल का प्राथमिक लक्ष्य लीकेज को कम करना है। वर्तमान में, इन जर्जर पाइपलाइनों के चलते पानी की बर्बादी (लीकेज और मिलावट) 55% तक पहुँच जाती है। जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने स्पष्ट किया कि नई और आधुनिक पाइपलाइनें बिछाने से लीकेज और मिलावट कम होगी, पेयजल की गुणवत्ता सुधरेगी, और हर नागरिक तक सुरक्षित पानी पहुँचना सुनिश्चित होगा। इस परियोजना का अंतिम लक्ष्य दिल्ली के हर घर को 24×7 साफ़ पानी उपलब्ध कराना है।
यह व्यापक पाइपलाइन रिप्लेसमेंट प्रोजेक्ट पूरे दिल्ली के पानी के ढांचे का आधुनिकीकरण करेगा। इस बड़े ओवरहाल का काम अगले दो से तीन सालों में चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। हालांकि, यह एक बड़ी परियोजना है; पूरे 7000 किलोमीटर नेटवर्क को सुधारने में अनुमानित 7 से 8 वर्ष का समय लग सकता है। इसके लिए बड़े स्तर पर टेंडर जारी किए जाएंगे और पूरे शहर में पाइपलाइन रिप्लेसमेंट को प्राथमिकता दी जाएगी।
यह परियोजना दिल्ली के लाखों नागरिकों के लिए जल आपूर्ति को अधिक विश्वसनीय और सुरक्षित बनाने का संकेत है, जिससे आने वाले वर्षों में राजधानी में जल संकट को कम करने में बड़ा योगदान मिलेगा।









