बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से नवाजने की मांग ने राष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक आधिकारिक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने नीतीश कुमार के दशकों लंबे राजनीतिक और सामाजिक योगदान का हवाला दिया है।
जेडीयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने अपने पत्र में यह स्पष्ट किया कि नीतीश कुमार समाजवादी आंदोलन के एक अनमोल रत्न रहे हैं। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक करियर में हमेशा गरीबों, किसानों और समाज के पिछड़े वर्गों के लिए काम किया है। त्यागी ने तर्क दिया कि हाल ही में जब चौधरी चरण सिंह और कर्पूरी ठाकुर जैसे समाजवादी पुरोधाओं को भारत रत्न से सम्मानित किया गया है, तो नीतीश कुमार भी इस सम्मान के हकदार हैं।
त्यागी ने इस आम धारणा को भी खारिज किया कि यह सम्मान केवल मरणोपरांत दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि कई महान हस्तियों को जीवित रहते हुए भी भारत रत्न से नवाजा गया है, इसलिए नीतीश कुमार को यह सम्मान देना पूरी तरह से सही होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के 30 मार्च 2024 के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे निर्णयों को इतिहास हमेशा याद रखता है। इसी उम्मीद के साथ करोड़ों लोगों की ओर से यह अपील की जा रही है कि नीतीश कुमार को भी यह सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया जाए।
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा है। उन्होंने राम मनोहर लोहिया की विचारधारा से जुड़कर राजनीति की शुरुआत की और जेपी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले नीतीश कुमार 1985 में पहली बार बिहार विधानसभा पहुंचे। 2000 में वे पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने, और तभी से राज्य की राजनीति का एक अपरिहार्य चेहरा बने हुए हैं।
भले ही केसी त्यागी इन दिनों पार्टी में साइडलाइन चल रहे हों, लेकिन उनकी इस मांग ने देश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें प्रधानमंत्री मोदी के फैसले पर टिकी हैं कि क्या वह जेडीयू नेता की अपील को स्वीकार करते हैं और क्या नीतीश कुमार को देश का यह सर्वोच्च सम्मान प्राप्त होता है।









