हिजाब पहनने वाली महिला बनेगी प्रधानमंत्री: ओवैसी के बयान पर सियासी बवाल, कपिल मिश्रा का तीखा पलटवार

सियासी हलचल-ओवैसी कपिल मिश्रा ने ओवैसी पर हमला
सियासी हलचल-ओवैसी कपिल मिश्रा ने ओवैसी पर हमला

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के एक हालिया बयान ने देश की राजनीति में बड़ी हलचल मचा दी है। महाराष्ट्र के सोलापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने दावा किया कि भारत का संविधान सभी को बराबरी का अधिकार देता है, और आने वाले समय में एक हिजाब पहनने वाली महिला देश की प्रधानमंत्री बन सकती है। उनके इस बयान ने एक बार फिर हिजाब पर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है, जिस पर भाजपा नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई है।

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अपने संबोधन में संवैधानिक समानता पर जोर देते हुए कहा कि पहनावे के आधार पर किसी को रोका नहीं जा सकता। उनके अनुसार, यह भारतीय लोकतंत्र की शक्ति है कि वह सभी को समान अवसर प्रदान करता है। हालांकि, ओवैसी के इस बयान को तुरंत ही एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल दिया गया।

इस बयान पर दिल्ली के नेता कपिल मिश्रा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। कपिल मिश्रा ने ओवैसी पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्हें डर है कि कहीं एक दिन ऐसा न हो जाए कि ओवैसी को ही बुर्का पहनकर भागना पड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि ओवैसी जैसे बयान समाज को बांटने और तनाव पैदा करने का काम करते हैं।

कपिल मिश्रा ने इस दौरान महाराष्ट्र की राजनीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को मंच से ‘जय श्री राम’ बोलकर दिखाने की खुली चुनौती दी। मिश्रा ने आरोप लगाया कि कुछ नेता हरे झंडों के बीच खड़े होकर भाषण देते हैं, लेकिन बाद में भगवा की बात करते हैं। उन्होंने साफ किया कि मुंबई और पूरे महाराष्ट्र में अब बीजेपी और महायुति के पक्ष में स्पष्ट माहौल बन चुका है। उन्होंने दावा किया कि जनता कोविड काल के दौरान हुए भ्रष्टाचार को नहीं भूली है, और आगामी चुनावों में गलत काम करने वालों को जवाब जरूर मिलेगा। मिश्रा ने जोर देकर कहा कि अंत में असली जीत छत्रपति शिवाजी महाराज और हिंदू संस्कृति में विश्वास रखने वालों की होगी, न कि औरंगजेब का हवाला देने वालों की।

ओवैसी के बयान और कपिल मिश्रा की प्रतिक्रिया के बाद हिजाब का मुद्दा अब केवल पहनावे तक सीमित न रहकर धर्म, राजनीति और चुनावी रणनीति का एक अहम हिस्सा बन गया है। विरोधियों का कहना है कि ऐसे बयान चुनावी माहौल को गरमाने और सामाजिक तनाव पैदा करने के लिए दिए जा रहे हैं, जबकि ओवैसी के समर्थक इसे संवैधानिक अधिकारों की बात बता रहे हैं।

यह बयानबाजी दर्शाती है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में और भी जोर पकड़ेगा, क्योंकि राजनीतिक दल इस पर अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट करते रहेंगे और जनता भी इस बहस पर अपनी नजर बनाए हुए है।

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