साइबर अपराध की दुनिया में जालसाज रोज नए और खौफनाक तरीके इजाद कर रहे हैं। ताजा मामला श्रीनगर से सामने आया है, जहां ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी देकर एक बुजुर्ग दंपती से 48 लाख रुपये ठग लिए गए। जालसाजों ने खुद को सीबीआई और टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) का अधिकारी बताकर इस भयावह वारदात को अंजाम दिया।
साइबर अपराधियों ने श्रीनगर निवासी दंपती से व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए संपर्क साधा। आरोपियों ने उन्हें बताया कि उनका नाम एक बड़े वित्तीय घोटाले में आया है और इसकी जांच सीबीआई कर रही है। ठगों ने दंपती का विश्वास जीतने के लिए सीबीआई और ट्राई के फर्जी आधिकारिक आदेश भी साझा किए, ताकि उन्हें लगे कि वे वास्तव में सरकारी अधिकारियों से बात कर रहे हैं।
विश्वास जमाने के बाद जालसाजों ने दंपती पर मानसिक दबाव बनाना शुरू कर दिया। उन्हें धमकी दी गई कि यदि उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उनके बैंक खाते फ्रीज कर दिए जाएंगे और संपत्ति जब्त कर ली जाएगी, साथ ही उन्हें गिरफ्तार भी किया जा सकता है। इस डर को बनाए रखने के लिए, साइबर ठगों ने दंपती को कई दिनों तक चौबीसों घंटे वीडियो कॉल के जरिए निगरानी में रखा। उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी और यहां तक कि वॉशरूम जाते समय भी वीडियो कॉल को ऑन रखने के लिए मजबूर किया गया। इस गंभीर मानसिक प्रताड़ना के चलते डरे हुए दंपती ने जालसाजों के अलग-अलग बैंक खातों में कुल 48 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
मामला सामने आने के बाद साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन सेंटर फॉर एक्सीलेंस क्राइम ब्रांच ने तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी कॉल, वीडियो कॉल या संदेश पर भरोसा न करें, जहां कोई व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी बताकर गिरफ्तारी या संपत्ति जब्त करने की धमकी दे। ऐसे किसी भी घटनाक्रम की सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क कर दें।
यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे नए तरीकों से ठग लोगों को डराकर बड़ी रकम ऐंठ रहे हैं। सतर्क रहें और किसी भी तरह के दबाव में आकर अपनी निजी जानकारी या पैसा ट्रांसफर न करें।









