प्रयागराज के माघ मेला में शंकराचार्य जी और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हुई कथित झड़प का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। ब्रज भूमि के संत समाज ने इस घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। संतों का स्पष्ट कहना है कि शंकराचार्य जी को पुनः सम्मानपूर्वक गंगा में स्नान कराया जाए और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
माघ मेले के दौरान हुई इस घटना को संत समाज शंकराचार्य पीठ का अपमान मान रहा है। इस संबंध में, श्री कृष्ण जन्म भूमि मंदिर केस के मुख्य याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा है कि कुछ अधिकारी जानबूझकर योगी सरकार को बदनाम करना चाहते हैं और उन्होंने शंकराचार्य भगवान का अपमान किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील करते हुए कहा कि, “आप संत हैं और संत की पीड़ा को आप ही जान सकते हैं, इसलिए अधिकारियों को निर्देशित करें कि शंकराचार्य जी को सम्मान सहित पुनः गंगा में स्नान कराने की कृपा करें।”
संत समाज ने दोषी अधिकारियों पर कठोरतम कार्रवाई की मांग की है। स्वामी अतुल कृष्ण दास महाराज ने कहा कि जिन अधिकारियों ने संतों की चोटी खींचकर जूतों से पीटने की धमकी दी, उन अधिकारियों की तत्काल जांच करके कार्रवाई की जाए। उन्होंने मांग की कि शंकराचार्य जी को सम्मान पूर्वक स्नान कराए जाने के लिए अधिकारियों को तत्काल सूचित किया जाए।
महामंडलेश्वर रामदास जी महाराज ने इस घटना की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा कि शंकराचार्य की पीठ भगवान शिव की गद्दी होती है और इस गद्दी का अपमान करने से बड़ा पाप लगता है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से, जो सनातन हिंदुओं के गौरव हैं, अधिकारियों को निर्देशित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जो भी दोषी है, उस पर कार्रवाई होनी चाहिए, जिससे शंकराचार्य जी महाराज की पीड़ा कम हो सके।
संत समाज ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती और शंकराचार्य जी को उनका उचित सम्मान नहीं मिलता, यह मुद्दा शांत नहीं होगा। अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अगले कदम पर टिकी हैं।









