उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति पर लगातार काम करने का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकारियों और ग्राम प्रधानों की मिलीभगत से बड़े घोटाले सामने आ रहे हैं। ताजा मामला निघासन विकास खंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत चखरा से आया है, जहां विकास कार्यों की आड़ में सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा है। इस मामले में गौशाला फंड के दुरुपयोग, तालाब पर अवैध कब्जे और यहां तक कि सच्चाई लिखने वाले पत्रकारों को धमकाने के गंभीर आरोप लगे हैं।
ब्लॉक निघासन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत चखरा में स्थिति बेहद चिंताजनक है। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत चलने वाले अभियान यहां पूरी तरह ‘जीरो’ दिखाई दे रहे हैं, जबकि विकास कार्यों के नाम पर सिर्फ बिलबिलाता भ्रष्टाचार नजर आ रहा है।
गौशाला फंड में घोटाला:- गौशालाओं के लिए सरकार अलग से बजट आवंटित करती है। आरोप है कि ग्राम प्रधान द्वारा इसी सरकारी बजट का इस्तेमाल करते हुए ग्राम पंचायत चखरा में एक तालाब (सरकारी संपत्ति) पर अवैध कब्जा कर लिया गया और लाखों रुपये खर्च करके उस पर अपना निजी घर बनवा लिया गया।
गौशाला की दयनीय स्थिति:- सरकार की मंशा के विपरीत, यहां गौशालाओं की स्थिति बेहद खराब है। गौशाला में न तो भूसे की उचित व्यवस्था है और न ही हरे चारे की। यह साफ तौर पर दिखाता है कि सीधे-सीधे सरकार की आंखों में धूल झोंकी जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ब्लॉक निघासन क्षेत्र के अंतर्गत कई ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से घोटाले मकड़ी के जाले की तरह दिन-रात फैल रहे हैं। इन मामलों पर जिले में एसी रूम में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की बड़ी लापरवाही देखने को मिल रही है।
सबसे गंभीर बात यह है कि इस भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले पत्रकारों की कलम दबाने की कोशिश की जा रही है। आरोप है कि यदि कोई पत्रकार पारदर्शिता से खबर प्रकाशित करता है, तो ग्राम प्रधान प्रतिनिधि व जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से उस पत्रकार पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर फंसा दिया जाता है। उच्च अधिकारी इन गंभीर मामलों का संज्ञान नहीं ले रहे हैं।
स्थानीय निवासियों ने जिला अधिकारी महोदया से अपील की है कि वे ग्राम पंचायत चखरा की स्थिति पर तुरंत एक नजर डालें। उन्होंने मांग की है कि गौशालाओं के फंड में हुई अनियमितताओं और सरकारी तालाब पर हुए अवैध कब्ज़े के मामले में तत्काल जांच शुरू की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।









