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गणतंत्र दिवस परेड: क्यों निकलती है झांकियां? जानिए 26 जनवरी की पूरी कहानी और महत्व

जानिए 26 जनवरी की पूरी कहानी और महत्व

बचपन की मिठाई, स्कूल की छुट्टी, और दूरदर्शन पर सुबह-सुबह दिखने वाली भव्य परेड- गणतंत्र दिवस की ये यादें हर भारतीय के दिल में बसी हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह परेड क्यों निकलती है? झांकियां कैसे चुनी जाती हैं? और इस वर्ष के खास मेहमान कौन हैं? 26 जनवरी 2026 को भारत जब अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाएगा, तो आइए जानते हैं इस राष्ट्रीय पर्व के ऐतिहासिक महत्व और परंपराओं की पूरी कहानी।

26 जनवरी सिर्फ एक तारीख नहीं, यह भारत के आत्मसम्मान की पहचान है। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था, जिससे देश एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बना। इस तारीख को चुनने का कारण 26 जनवरी 1930 की ऐतिहासिक घटना है, जब लाहौर अधिवेशन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज का ऐलान किया था। इस ऐतिहासिक स्मृति को सम्मान देने के लिए ही संविधान लागू करने के लिए 26 जनवरी की तारीख चुनी गई।

गणतंत्र दिवस परेड सिर्फ एक आयोजन नहीं, यह देश की सैन्य शक्ति, अनुशासन और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। भारत की पहली परेड 1950 में हुई थी, और 1955 से यह कर्तव्य पथ (तब राजपथ) पर स्थायी रूप से आयोजित की जाने लगी। 1953 में पहली बार राज्यों की झांकियों को शामिल किया गया था, जिसका उद्देश्य भाषाई और सांस्कृतिक विविधता के बावजूद देश की एकता को प्रदर्शित करना था।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से रक्षा मंत्रालय हर साल झांकियों के लिए प्रस्ताव मांगता है। इन प्रस्तावों को कला, संस्कृति, संगीत और आर्किटेक्चर के जानकार एक विशेषज्ञ समिति द्वारा मूल्यांकन किया जाता है। चयन क्वालिटी, थीम और राष्ट्रीय संदेश के आधार पर किया जाता है।

विदेश मंत्रालय करीब 6 महीने पहले इस प्रक्रिया की शुरुआत करता है। सैन्य सहयोग, आर्थिक रिश्ते और कूटनीतिक संतुलन जैसे कारकों को देखते हुए अंतिम फैसला प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति की मंजूरी से होता है। 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि होंगे।

समारोह की शुरुआत राष्ट्रपति के आगमन से होती है, जिसके बाद राष्ट्रगान के दौरान 21 तोपों की सलामी दी जाती है। 2023 से यह सलामी ‘मेक-इन-इंडिया’ तोपों से दी जा रही है, जो देश की आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। परेड में सेना, नौसेना, वायुसेना सहित विभिन्न सुरक्षा बलों के दस्ते शामिल होते हैं, जो सैकड़ों घंटे की कठोर प्रैक्टिस के बाद कर्तव्य पथ पर अपनी कदमताल प्रदर्शित करते हैं। झांकियां 5 किलोमीटर प्रति घंटे की तय रफ्तार से चलती हैं, जो राज्यों की समृद्ध संस्कृति और भारत के विकास को दर्शाती हैं।

गणतंत्र दिवस का उत्सव सिर्फ एक परंपरा नहीं, यह भारत की आत्मा, संविधान की ताकत, और राज्यों की विविधता में एकता का प्रदर्शन है। अगली बार जब आप परेड देखें, तो सिर्फ झांकियां नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे गौरवशाली इतिहास और राष्ट्रीय एकता के संदेश को महसूस करें। जय हिंद, जय भारत।

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