महाराष्ट्र की राजनीति में रंगों को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मुंब्रा नगरपालिका चुनाव में जीत के बाद AIMIM की पार्षद सहर यूनुस शेख के एक बयान ने सियासी पारा हाई कर दिया है। उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि अगले चुनाव में पूरे मुंब्रा को ‘हरा’ रंगना है। इस बयान के सामने आने के बाद सत्तारूढ़ महायुति ने AIMIM पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे यह स्थानीय मुद्दा अब राज्यव्यापी बहस का विषय बन गया है।
AIMIM पार्षद सहर यूनुस शेख के इस बयान पर सबसे मुखर और तीखी प्रतिक्रिया मुंबई BJP अध्यक्ष अमित साटम की तरफ से आई है। अमित साटम ने AIMIM पर सीधा हमला करते हुए स्पष्ट किया कि यह छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रपति संभाजी महाराज का महाराष्ट्र है। उन्होंने कहा कि, जिस महाराष्ट्र के मराठों ने मुल्तान और पेशावर तक हिंदवी स्वराज का झंडा लहराया, उस धरती को कोई ‘हरा’ नहीं कर सकता।
अमित साटम यहीं नहीं रुके। उन्होंने इसे केवल रंगों की बहस मानने से इनकार कर दिया और इसे सोच तथा मानसिकता की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि यह देश को तोड़ने वाली और समाज को बांटने वाली ताकतों की साजिश है। BJP अध्यक्ष ने चेतावनी भरे लहजे में दो टूक कहा कि, जिस मराठा समाज ने इतिहास रचा, उसकी जन्मभूमि को हरा करने का सपना आने वाले सौ जन्मों में भी पूरा नहीं होगा। उन्होंने साफ किया कि आपकी आने वाली सौ पुश्तें भी इस देश से भगवा रंग और भगवा झंडे को हटाने में कामयाब नहीं होंगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भले ही यह बयान नगरपालिका चुनाव के संदर्भ में आया हो, लेकिन इसका असर राज्य और राष्ट्रीय राजनीति तक जाता है। BJP का कहना है कि ‘हरा’ रंग सिर्फ एक रंग नहीं, बल्कि एक ऐसी मानसिकता का प्रतीक है जो संविधान की भावना से दूर ले जाती है। AIMIM की ओर से अब तक इस पर कोई औपचारिक सफाई नहीं दी गई है, लेकिन पार्टी पहले भी खुद को संविधान और लोकतंत्र के दायरे में राजनीति करने वाली बताती रही है।
मुंब्रा से शुरू हुआ यह विवाद अब सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने महाराष्ट्र की राजनीति में पहचान और विचारधारा की लड़ाई को फिर से केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह बयानबाजी राज्य की सियासत में और अधिक गर्मी लाएगी और यह देखना होगा कि यह विवाद किस दिशा में मोड़ लेता है।









