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माउंट एवरेस्ट पर फहराया गया राम मंदिर का धर्म ध्वज, अयोध्या में चंपत राय को सौंपी गई पावन ध्वजा

माउंट एवरेस्ट पर फहराया गया राम मंदिर का धर्म ध्वज

अयोध्या से शुरू हुई सनातन आस्था की ऐतिहासिक यात्रा ने अब दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट को छू लिया है। हरियाणा के जाबांज पर्वतारोही नरेंद्र कुमार और उनके दल ने राम मंदिर के प्रतीक धर्म ध्वज को एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक फहराकर नया इतिहास रच दिया है। हाल ही में, यह पावन ध्वजा वापस अयोध्या लाई गई और विधिवत पूजन के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय को सौंप दी गई। यह पल आस्था, साहस और राष्ट्रगौरव से जुड़ा एक विशेष क्षण बन गया है।

हिसार निवासी पर्वतारोही नरेंद्र कुमार और उनके साथियों ने इस अत्यंत कठिन अभियान को पूरा किया। एवरेस्ट की चोटी पर राम मंदिर के शिखर की ध्वजा फहराने के बाद, इसे विधिवत पूजन के साथ कारसेवकपुरम में महासचिव चंपत राय को सौंपा गया। इस मौके पर यह आग्रह भी किया गया कि देश के सातों प्रमुख पर्वतीय शिखरों पर फहराई जाने वाली इस धर्म ध्वजा को मंदिर की प्रदर्शनी में रखा जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां इससे प्रेरणा ले सकें।

इस ऐतिहासिक अभियान के संयोजक राज पुरोहित मधुर ने बताया कि यह पावन यात्रा 1 दिसंबर को श्री राम जन्मभूमि अयोध्या से शुरू हुई थी। दल नेपाल के रास्ते पैदल यात्रा करता हुआ 29 दिसंबर को लगभग 18 हजार फीट की ऊँचाई पर स्थित एवरेस्ट बेस कैंप पहुँचा था। वहाँ से आगे बढ़ते हुए नरेंद्र कुमार ने बर्फीले मौसम और तेज हवाओं का सामना करते हुए माउंट एवरेस्ट की चोटी पर भगवान श्री राम का धर्म ध्वज फहराया।

पर्वतारोही नरेंद्र कुमार ने इस उपलब्धि पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा, “यह अभियान सिर्फ पर्वतारोहण नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और भगवान श्री राम की चेतना को विश्व की ऊँचाइयों तक पहुँचाने का संकल्प है।” उन्होंने आगे कहा कि यह दिव्य पहल मूल रूप से ऋतंबरा भारद्वाज द्वारा परिकल्पित की गई थी, जिसका उद्देश्य राम मंदिर से उठे सनातन धर्म ध्वज को दुनिया के प्रमुख शिखरों तक पहुँचाना और भारतीय संस्कृति का वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार करना है।

यह उपलब्धि पर्वतारोहण और आस्था के क्षेत्र में एक अद्वितीय कीर्तिमान है, जो यह संदेश देती है कि जब आस्था, साहस और संकल्प एकजुट होते हैं, तो दुनिया की सबसे ऊँची चोटी भी झुक जाती है। यह देश, धर्म और संस्कृति के लिए एक अत्यंत गर्व का क्षण है।

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