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पद्म भूषण विवाद: कोश्यारी को सम्मान देने पर भड़के संजय राउत, कहा- ‘लोकतंत्र और संविधान की हत्या की’

संजय राउत ने पूर्व राज्यपाल कोश्यारी पर साधा निशाना

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। केंद्र सरकार द्वारा पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण दिए जाने के फैसले पर शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कड़ा विरोध जताया है। राउत ने इस सम्मान को महाराष्ट्र के लोगों की भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं और इसे संविधान का अपमान बताया है।

शिवसेना नेता संजय राउत ने केंद्र सरकार के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भगत सिंह कोश्यारी ने अपने राज्यपाल कार्यकाल के दौरान महाराष्ट्र में लोकतंत्र और संविधान को गंभीर नुकसान पहुंचाया। राउत ने आरोप लगाया कि कोश्यारी ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाविकास आघाड़ी (MVA) सरकार को गिराने में अहम भूमिका निभाई। उनके मुताबिक, उद्धव सरकार के पास स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद, राजनीतिक दबाव और गलत संवैधानिक फैसलों के जरिए सरकार गिराई गई, जिससे राज्य में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए रास्ता साफ हुआ।

राउत ने इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने एक फैसले में यह टिप्पणी की थी कि राज्यपाल के तौर पर भगत सिंह कोश्यारी ने कुछ ऐसे कदम उठाए थे, जो संवैधानिक मर्यादाओं के दायरे में नहीं आते। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस व्यक्ति पर संवैधानिक मर्यादाओं को तोड़ने के आरोप हों, उसे देश के इतने बड़े सम्मान (पद्म भूषण) से कैसे नवाजा जा सकता है?

संजय राउत ने कोश्यारी के पुराने विवादित बयानों को भी निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि भगत सिंह कोश्यारी ने महाराष्ट्र के पूजनीय महापुरुषों—छत्रपति शिवाजी महाराज, महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले—को लेकर आपत्तिजनक बातें कही थीं। राउत ने जोर देकर कहा कि महाराष्ट्र में इन हस्तियों का immense सम्मान है और ऐसे व्यक्ति को पद्म भूषण देना महाराष्ट्र का सीधा अपमान है।

राउत ने मौजूदा महायुति सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार को भी इस फैसले का विरोध करना चाहिए था। हालांकि, उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण मिलने पर उन्हें बधाई दी है, जिससे यह विवाद और गहरा गया है।

पूर्व राज्यपाल को मिले इस राष्ट्रीय सम्मान के विरोध में महाराष्ट्र की राजनीति में उठा यह तूफान आने वाले दिनों में और भी तूल पकड़ सकता है, जिससे राज्य में राजनीतिक बयानबाजी चरम पर पहुंच गई है।

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