गुप्त नवरात्रि (Gupt Navratri) की नवमी तिथि धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह वह विशेष दिन है जब दस महाविद्याओं में से मां मातंगी के साथ ही धन, ऐश्वर्य और समृद्धि की देवी मां कमला का पूजन किया जाता है। मां कमला, जिन्हें साक्षात महालक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है, उनकी आराधना करने से भक्तों को न केवल आर्थिक सुरक्षा मिलती है, बल्कि जीवन में सुख-शांति और समग्र खुशहाली भी आती है। आइए जानते हैं नवमी तिथि पर देवी कमला की पूजा का महत्व और सरल विधि।
मां कमला का स्वरूप और महत्व:
मां कमला दस महाविद्याओं में से दसवीं महाविद्या हैं और उन्हें सीधे तौर पर देवी लक्ष्मी का ही स्वरूप माना गया है। उन्हें सौंदर्य, राजसी ऐश्वर्य और भौतिक समृद्धि की देवी कहा जाता है। गुप्त नवरात्रि की नवमी तिथि पर उनका पूजन करना अत्यधिक विशेष माना जाता है क्योंकि यह अवधि साधक को गुप्त शक्तियों और त्वरित फल प्राप्ति में सहायता करती है।
पूजन से प्राप्त होने वाले प्रमुख लाभ:
मां कमला का विधिवत पूजन करने से व्यक्ति के जीवन में धन-धान्य की कमी दूर होती है।
घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है और कलह समाप्त होकर सुख-शांति का वास होता है।
व्यक्ति को अपने व्यवसाय या नौकरी में लगातार उन्नति और सफलता प्राप्त होती है।
यह पूजन नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर जीवन में केवल ऐश्वर्य और समृद्धि का प्रवाह सुनिश्चित करता है।
नवमी तिथि पर ऐसे करें मां कमला का पूजन:
नवमी के दिन देवी के पूजन से घर में धन, ऐश्वर्य और सुख-शांति का प्रवाह बढ़ाने के लिए भक्त निम्नलिखित विधि अपना सकते हैं:
1. स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और देवी कमला व मातंगी की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें।
2. मां को लाल वस्त्र और श्रृंगार अर्पित करें। मां कमला को कमल का पुष्प (अत्यंत प्रिय) और अन्य लाल फूल अवश्य अर्पित करें।
3. देवी के सामने शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करें।
4. प्रसाद के रूप में मिष्ठान या खीर अर्पित करें।
5. पूजन के दौरान पूरी श्रद्धा के साथ महालक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें।
यदि आप जीवन में आर्थिक स्थिरता, व्यवसायिक उन्नति और आंतरिक शांति चाहते हैं, तो गुप्त नवरात्रि की इस नवमी तिथि पर मां कमला और मां मातंगी का पूजन करना अत्यंत शुभ और फलदायक सिद्ध होगा।









