आधुनिक शहरी जीवनशैली में, जहां हर इंच जगह कीमती है, आपके फ्लैट्स की बालकनी अब वह सुकून भरी जगह नहीं रही। बड़े शहरों जैसे दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु में नए अपार्टमेंट्स में बालकनी का साइज इतना सिकुड़ गया है कि यह बस कपड़े सुखाने या बचा-खुचा सामान रखने की जगह बनकर रह गई है। एक समय जिसे शाम की चाय पीने और ताजी हवा लेने का अड्डा माना जाता था, वह अनुभव अब बदल चुका है। जानिए, क्यों शहरों से ओपन स्पेस धीरे-धीरे गायब हो रहा है और इसका मुख्य कारण क्या है।
जमीन की मजबूरी और डेवलपर्स का गणित:
बड़े शहरों में जमीन की कमी और प्रॉपर्टी की आसमान छूती कीमतों ने डेवलपर्स को ‘कार्पेट एरिया’ (घर के अंदर का उपयोगी स्थान) पर अधिक ध्यान केंद्रित करने पर मजबूर किया है। डेवलपर्स अब सुपर-बिल्ट-अप एरिया के बजाय उस स्पेस को बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं जो सीधे खरीदार के काम आए। विशेषज्ञों का कहना है कि बायर्स भी अब घर के अंदर के उपयोगी स्पेस को ज्यादा महत्व दे रहे हैं, इसलिए बिल्डर्स उनकी प्राथमिकता के हिसाब से छोटी बालकनी दे रहे हैं ताकि घर का अंदरूनी हिस्सा बड़ा दिख सके। बढ़ती आबादी और शहरी जगह की कमी ने भी इस चलन को बढ़ावा दिया है।
कितना छोटा हुआ बाहरी स्पेस?
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम जैसे इलाकों में, जहां पहले आमतौर पर 5 से 6 फीट चौड़ी बालकनी मिलती थी, अब नए प्रोजेक्ट्स में यह साइज 11×4 फीट या इससे भी कम रह गया है। इस कटौती के कारण फ्लैट्स में मिलने वाले यूज़ेबल स्पेस में लगभग 5-10 प्रतिशत तक की कमी आई है। इस सिकुड़न का एक अन्य कारण शहरों में बढ़ता प्रदूषण, शोर-शराबा और मच्छरों की समस्या भी है, जिसने लोगों को बाहर बैठना कम पसंद करने पर मजबूर कर दिया है, जिससे डेवलपर्स भी इसे छोटा बनाने में सहज महसूस करते हैं।
मध्यम वर्ग के लिए केवल नाम की बालकनी:
यह चलन मुख्य रूप से मध्यम वर्ग और बजट फ्लैट्स में देखा जा रहा है। बड़ी और विशाल बालकनी अब सिर्फ लक्जरी सेगमेंट या हाई बजट वाले अपार्टमेंट्स में ही दिखती हैं। किफायती आवास के दबाव में, अधिकांश खरीदारों को अब केवल प्रतीकात्मक या बहुत छोटी बालकनी से ही संतोष करना पड़ता है, जिससे खुली हवा और प्राकृतिक रोशनी का उनका अनुभव सीमित हो गया है।
इसलिए, अगली बार जब आप अपना नया आशियाना खरीदें, तो केवल कार्पेट एरिया ही नहीं, बल्कि बालकनी के वास्तविक और उपयोगी साइज पर भी ध्यान दें, ताकि ताज़ी हवा लेने का आपका अनुभव सिर्फ कागज़ों तक सीमित न रह जाए।









