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CM योगी के समर्थन में अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह का इस्तीफा, शंकराचार्य के बयान पर जताई नाराजगी

CM योगी के समर्थन में अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह का इस्तीफा

उत्तर प्रदेश में एक बड़ी प्रशासनिक घटना सामने आई है। अयोध्या में राज्य कर विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह कदम हाल ही में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के खिलाफ की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियों से आहत होकर उठाया है। उन्होंने जल्द ही अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंपने की घोषणा की है।

डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह ने अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए साफ किया कि वह राज्य व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के कारण यह फैसला ले रहे हैं। प्रशांत सिंह (उपायुक्त कर, अयोध्या) ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “बीते कुछ दिनों से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ लगातार अपमानजनक टिप्पणी की जा रही हैं। मैं इन टिप्पणियों को देश के संविधान, राज्य व्यवस्था और देश की एकता के लिए गैरजिम्मेदाराना मानता हूं।”

उन्होंने आगे कहा कि पीएम मोदी और सीएम योगी जनता द्वारा लोकतांत्रिक तरीके से चुने हुए पदों पर हैं, और उन पर इस प्रकार की टिप्पणियां करना आहत करने वाला है। प्रशांत सिंह ने स्पष्ट किया कि वह सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में तथा शंकराचार्य के विरोध में इस्तीफा दे रहे हैं। अपने इस्तीफे में उन्होंने विशेष रूप से लिखा है कि, ‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रदेश के मुखिया हैं और उनका अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। जिस प्रदेश का मैं नमक खाता हूँ, मैं उसी प्रदेश और उसके नेतृत्व का पक्षधर हूं।’

प्रशांत सिंह ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य लोगों को गुमराह कर इस्तीफा देने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने हाल ही में हुए बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफे का जिक्र करते हुए कहा कि सरकारी विरोध में इस्तीफा देने पर धर्म के क्षेत्र में बड़े पद का आश्वासन दिया जा रहा है, जो समाज और प्रशासन के लिए ठीक नहीं है और एक गलत परंपरा को जन्म देता है।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब माघ मेले के दौरान शंकराचार्यों के बीच भी विवाद की खबरें चल रही हैं। डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह का यह कदम प्रशासनिक अधिकारियों और धार्मिक नेताओं के बीच चल रही बहस को एक नया और विवादास्पद मोड़ देता है।

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