मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। अमेरिकी नौसेना ओमान की खाड़ी में एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ तैनात है, तो उधर ईरान लगातार कड़े मिसाइल टेस्ट और सैन्य अभ्यास कर रहा है। सवाल यह है कि क्या दुनिया एक और खतरनाक जंग के मुहाने पर खड़ी है? सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई के कथित रूप से हाई-सिक्योरिटी बंकर में शिफ्ट होने की खबरों ने इस आशंका को और बढ़ा दिया है। आइए जानते हैं कि इस तनाव की असली वजह क्या है और शक्तिशाली होने के बावजूद अमेरिका तुरंत हमला करने से क्यों हिचक रहा है।
ओमान की खाड़ी में यूएसएस अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर की मूवमेंट और ईरान का हाई अलर्ट, मौजूदा स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। सबसे बड़ी खबर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई से जुड़ी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, खामनेई को तेहरान स्थित एक विशाल अंडरग्राउंड नेटवर्क में शिफ्ट कर दिया गया है। दावा है कि यह बंकर 90 से 100 मीटर गहरा है, जो फोर्टिफाइड कंक्रीट और स्टील की कई परतों से बना है। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि बंकर बस्टर बम या परमाणु हमले का भी इस पर असर न हो सके।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका के पास तमाम सैन्य शक्ति होने के बावजूद वह ईरान पर हमला करने से पहले कई बार विचार कर रहा है। इसकी मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:
ईरान ने खुली चेतावनी दी है कि हमला होने पर अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर पहला निशाना होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइल दागी जा सकती हैं, जिससे अब्राहम लिंकन की सुरक्षा करना अमेरिका के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।
माना जा रहा है कि रूस से मिले S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती ने अमेरिकी फाइटर जेट्स (F-15, F-16, F-35) के लिए खतरा बढ़ा दिया है। साथ ही, ईरान के पास 7000 किमी से अधिक रेंज वाली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) होने के दावे हैं, जो यूरोप ही नहीं, बल्कि अमेरिका तक को सीधे खतरे में डालते हैं।
यूएई, कतर और सऊदी अरब जैसे प्रमुख देश अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र का उपयोग ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं करने देना चाहते। वे चाहते हैं कि उनके बेस पर ईरान की मिसाइलें न गिरें, जिससे अमेरिकी रणनीति कमजोर पड़ रही है।
ईरान के सहयोगी गुट (हूती, हिजबुल्ला) लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर बड़ा असर डाल सकते हैं। हूती पहले ही समुद्री हमलों की अपनी क्षमता दिखा चुके हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हो सकती है।
ईरान की राजधानी तेहरान के एंगेलाब स्क्वायर पर लगे चेतावनी वाले पोस्टरों (जिसमें जलते हुए अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर दिखाए गए हैं) से स्पष्ट है कि ईरान मनोवैज्ञानिक और सैन्य दोनों तरह से तैयार है। अगर यह आग तीसरे विश्व युद्ध में बदलती है, तो इसका असर दुनिया पर भयानक होगा। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि मात्र 100 न्यूक्लियर बमों के फटने से भी ‘न्यूक्लियर विंटर’ की स्थिति बन सकती है, जिससे पूरी धरती पर फसलें नष्ट हो जाएंगी और करोड़ों लोग भुखमरी के शिकार हो जाएंगे। भारत समेत पूरी दुनिया में तेल की कीमतों, व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ेगा।
फिलहाल अमेरिका फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है और ईरान खुली चुनौती दे रहा है। यह देखना बाकी है कि राजनयिक प्रयास सफल होते हैं या फिर मिडिल ईस्ट की यह आग पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेती है।









