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एक्सप्रेस-वे पर नई Scorpio N ने दिया धोखा, वारंटी में भी थमा दिया ₹49,491 का बिल!

मेरठ-नोएडा एक्सप्रेसवे पर खराब हुई नई महिंद्रा स्कॉर्पियो एन और कारोबारी हरिओम चौधरी।

हाल ही में मेरठ-नोएडा एक्सप्रेसवे पर एक बड़ा हादसा टल गया, जिसने एक प्रतिष्ठित ऑटोमोबाइल कंपनी के सुरक्षा दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आगरा के वरिष्ठ कारोबारी हरिओम चौधरी की नई महिंद्रा स्कॉर्पियो एन (Scorpio N) महज छह महीने के भीतर ही एक्सप्रेस-वे पर अचानक फेल हो गई, जिससे उनकी और उनके साथियों की जान खतरे में पड़ गई। इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि वारंटी पीरियड में होने के बावजूद, कंपनी ने ग्राहक को लगभग 50 हजार रुपये का भारी-भरकम बिल थमा दिया है।

मेरठ-नोएडा एक्सप्रेसवे पर 26 जनवरी की शाम यह घटना तब हुई, जब ई-56 न्यू आगरा निवासी हरिओम चौधरी (पिता स्व. गुलाब सिंह) अपने भाई शेरु पहलवान और अन्य साथियों के साथ एक जरूरी मीटिंग के सिलसिले में मसूरी जा रहे थे। शाम करीब 6:30 बजे, तेज रफ्तार से चलती हुई नई स्कॉर्पियो एन का गियर बॉक्स अचानक फ्री हो गया और पूरा सिस्टम ठप पड़ गया, जिससे गाड़ी नियंत्रण से बाहर हो गई। शुक्र है कि किसी तरह गाड़ी रोकी जा सकी, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

कंपनी की रोड-साइड असिस्टेंस (RSA) में भारी देरी

कारोबारी हरिओम चौधरी ने बताया कि यह गाड़ी पिछले साल जून-जुलाई में उनके साले नीरज राणा (पुत्र राजाराम राणा, निवासी जीवन मंडी, आगरा) के नाम पर खरीदी गई थी और इसका रजिस्ट्रेशन नंबर UP80 HP 6815 है। महज 6 महीने में आई इस तकनीकी खराबी ने कंपनी की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। घटना के बाद जब महिंद्रा कंपनी से संपर्क किया गया, तो कंपनी के 45 से 90 मिनट के दावे के बावजूद, दिल्ली-एनसीआर जैसे क्षेत्र में रोड-साइड असिस्टेंस (RSA) लगभग 3 घंटे बाद पहुंची। इसके बाद गाड़ी को टो करके सेक्टर-59 नोएडा स्थित महिंद्रा गैराज ले जाया गया।

वारंटी में होने पर भी ग्राहक को थमा दिया गया भारी बिल

इस मामले में नया मोड़ तब आया जब अगले दिन 27 जनवरी को कंपनी की ओर से 49,491 रुपये का बिल भेज दिया गया। कंपनी ने बिल में गाड़ी में कई गंभीर खामियां गिनाईं, जबकि गाड़ी नई है और स्पष्ट रूप से वारंटी अवधि में है। हरिओम चौधरी का आरोप है कि जब उन्होंने गैराज मैनेजर से बात की, तो उनका व्यवहार बेहद गैर-जिम्मेदाराना और अनुचित था। चौधरी ने सवाल उठाया है कि अगर यह मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट (निर्माण दोष) है, तो इसकी कीमत ग्राहक क्यों चुकाए? यह मामला सिर्फ एक ग्राहक की समस्या नहीं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा और भरोसे से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है।

महिंद्रा जैसी नामी ऑटोमोबाइल कंपनी की गाड़ी का एक्सप्रेसवे पर अचानक फेल होना और फिर ग्राहक को ही मरम्मत का भारी बिल थमा देना, कंपनी के ग्राहक सेवा मानकों पर बड़े सवाल खड़े करता है। अब देखना यह है कि कंपनी इस सुरक्षा चूक पर जिम्मेदारी लेती है या ग्राहक को ही दोषी ठहराएगी।

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