उत्तर प्रदेश के वाराणसी में कोडीन युक्त कफ सिरप की तस्करी के काले कारोबार पर कमिश्नरेट पुलिस का ‘ऑपरेशन क्लीन’ अब तेज हो गया है। इस बड़े ड्रग सिंडिकेट के मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल और उसकी फर्म शैली ट्रेडर्स की परतें लगातार खुल रही हैं। वाराणसी की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने इस नेटवर्क की कमर तोड़ने के लिए अब डिजिटल स्ट्राइक की है, जिससे पूरे शहर के ड्रग माफियाओं में हड़कंप मच गया है।
जांच टीम ने शैली ट्रेडर्स से जुड़े करीब 2500 संदिग्ध मोबाइल नंबरों को अपने रडार पर लिया है। इन नंबरों की गहनता से जांच की जा रही है ताकि सिंडिकेट के हर सदस्य और खरीदारों तक पहुंचा जा सके। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच की आंच तेज होते ही पक्के महाल, मैदागिन और सप्तसागर दवा मंडी से जुड़े करीब 40 युवक शहर छोड़कर फरार हो चुके हैं, जिनकी लोकेशन ट्रेस करने का काम युद्धस्तर पर जारी है।
जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। SIT की रिपोर्ट के मुताबिक, इस तस्करी के खेल से कमाए गए अवैध धन को इन युवकों ने होटल, गेस्ट हाउस और प्रॉपर्टी डीलिंग में निवेश किया है। SIT अब पिछले तीन सालों में अचानक उभरे इन ‘करोड़पतियों’ की कुंडली खंगाल रही है। जांच में यह भी पुख्ता जानकारी मिली है कि यह पूरा अवैध सप्लाई नेटवर्क फर्जी लाइसेंस और नकली बिलिंग के जरिए फैलाया गया था। ओसानगंज के एक पिता-पुत्र और उनके रिश्तेदारों की संलिप्तता भी इस मामले में पुख्ता मानी जा रही है।
पुलिस अधिकारियों ने इस मामले पर कड़ा रुख दिखाते हुए कहा है कि अवैध तरीके से अर्जित की गई संपत्तियों की कुर्की (अटैचमेंट) की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। अधिकारियों ने यह भी पुष्टि की है कि जल्द ही इस रैकेट से जुड़े कई सफेदपोश चेहरे भी सलाखों के पीछे होंगे। यह कार्रवाई बताती है कि पुलिस ड्रग सिंडिकेट की जड़ों को पूरी तरह से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।
वाराणसी में ‘ऑपरेशन क्लीन’ ड्रग माफियाओं के खिलाफ एक निर्णायक मोड़ साबित हो रहा है, और आने वाले दिनों में कई बड़ी गिरफ्तारियां और संपत्तियों की कुर्की देखने को मिल सकती है।









