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शांति वार्ता से पहले रूस का भीषण प्रहार: -20°C में 70 मिसाइलों से दहला यूक्रेन, कीव में अंधेरा

यूक्रेन पर बरसीं 70 रूसी मिसाइलें, 450 ड्रोन्स ने मचाया कोहराम

यूक्रेन से इस वक्त की सबसे दहला देने वाली खबर सामने आ रही है। जहां एक तरफ वैश्विक मंचों पर शांति वार्ता की पहल की जा रही थी, वहीं दूसरी तरफ रूस ने यूक्रेन पर अब तक का सबसे बड़ा और क्रूर हवाई हमला बोल दिया है। इस भीषण प्रहार में पुतिन की सेना ने 70 क्रूज मिसाइलें और 450 आत्मघाती ड्रोनों का इस्तेमाल किया, जिसने यूक्रेन को -20 डिग्री सेल्सियस की जमा देने वाली ठंड के बीच अंधेरे में डुबो दिया है। यह हमला दर्शाता है कि पुतिन कूटनीति की जगह तबाही को प्राथमिकता दे रहे हैं।

एक ही रात में आसमान से बरसती मौत और जमीन पर बिछी बर्फ की सफेद चादर आज के यूक्रेन की भयावह हकीकत है। रूस-यूक्रेन युद्ध को भले ही चार साल होने को आए हैं, लेकिन हालिया प्रहार को ‘सबसे शक्तिशाली झटका’ बताया जा रहा है।

यह हमला तब हुआ जब राजधानी कीव समेत अधिकांश यूक्रेन में तापमान गिरकर -20 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। हीटिंग सिस्टम पूरी तरह ठप हो गए हैं और बिजली गायब है, जिससे लाखों लोग अपने ही घरों में जमने को मजबूर हैं। कीव के 1,000 से अधिक रिहायशी टॉवर ब्लॉक अंधेरे और सन्नाटे में डूब गए हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने साफ किया है कि रूस ने जानबूझकर रिकॉर्ड संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर ऊर्जा संकट पैदा किया है, ताकि ठंड को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।

पुतिन ने सिर्फ वर्तमान पर नहीं, बल्कि साझा इतिहास पर भी वार किया है। कीव में स्थित सोवियत युग का ऐतिहासिक ‘द्वितीय विश्व युद्ध स्मारक’ रूसी मिसाइलों की चपेट में आ गया। यह वह स्मारक था जो नाजी जर्मनी पर जीत की याद दिलाता था। स्थानीय नागरिक इसे ‘सांस्कृतिक नरसंहार’ बता रहे हैं।

यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिका की मध्यस्थता में अबू धाबी में शांति वार्ता का दूसरा दौर शुरू होने वाला था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन से युद्ध रोकने की अपील की थी, लेकिन पुतिन ने इन अपीलों को ठेंगा दिखा दिया है। नाटो प्रमुख मार्क रुटे ने भी कीव का दौरा करने के बाद इस हमले को शांति की ओर बढ़ते कदम नहीं, बल्कि ‘आतंकवाद का नया चेहरा’ करार दिया है। इस क्रूर हमले का नतीजा यह रहा कि दक्षिणी शहर जापोरिज्जिया में रिहायशी इलाकों पर हुए हमलों में दो किशोरों की जान चली गई।

सवाल अब यह है कि क्या पुतिन की यह क्रूर रणनीति यूक्रेन का मनोबल तोड़ पाएगी, या फिर इस भीषण ठंड और तबाही के बाद पश्चिमी देश यूक्रेन को और घातक हथियार मुहैया कराने के लिए मजबूर होंगे। फिलहाल, यूक्रेन की सर्द रातें तबाही और अनिश्चितता के साथ लंबी होती जा रही हैं।