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अजित पवार के निधन के बाद NCP का भविष्य: क्या शरद पवार से मिलेंगे पार्थ और जय? विलय पर सस्पेंस!

अजित पवार के निधन के बाद NCP का भविष्य

महाराष्ट्र की राजनीति में शोक और सत्ता के बीच एक नया अध्याय शुरू हो गया है। 28 जनवरी को हुए दुखद विमान हादसे में अजित पवार के निधन के बाद न केवल पवार परिवार, बल्कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का भविष्य भी सवालों के घेरे में आ गया है। इस बीच, अजित पवार के बेटे पार्थ और जय पवार की ‘दादा’ शरद पवार से हुई हालिया मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में विलय की अटकलों को फिर से हवा दे दी है।

अजित पवार, जो छह बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री रहे, उनके आकस्मिक निधन से राज्य की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है। इस दुखद घटना के तुरंत बाद, पवार परिवार और एनसीपी में नेतृत्व की अग्निपरीक्षा शुरू हो गई है। उनके जाने के तीन दिन बाद ही उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र का उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। यह कदम न केवल सत्ता में उनकी भूमिका को मजबूत करता है, बल्कि एनसीपी के भविष्य की दिशा तय करने में भी अहम माना जा रहा है।

राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी हलचल तब मची, जब शरद पवार ने हाल ही में बारामती स्थित पैतृक आवास पर अजित पवार के दोनों बेटों, पार्थ पवार और जय पवार, से लगभग डेढ़ घंटे तक बंद कमरे में मुलाकात की। एनसीपी पहले से ही दो गुटों (शरद पवार के नेतृत्व वाला और अजित पवार के नेतृत्व वाला गुट) में बंटी हुई थी, और इस बैठक ने विलय की संभावनाओं को फिर से जीवित कर दिया है। वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि अजित पवार खुद दोनों गुटों को एकजुट करने की कोशिश कर रहे थे।

शरद पवार ने सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनने पर समर्थन जताया है, लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी की विचारधारा पर किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। हालांकि, शरद पवार की सुनेत्रा के घर पर हुई हालिया मुलाकात और पार्थ-जय पवार के साथ लंबी बातचीत ने साफ संकेत दिए हैं कि पवार परिवार राजनीति को एक बार फिर साथ लाने की दिशा में काम कर रहा है। सुनेत्रा पवार के कंधों पर अब बड़ी जिम्मेदारी है- एक नेता के रूप में पार्टी को संभालने की और दो बेटों के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाने की।

यह घटनाक्रम सिर्फ राजनीति की कहानी नहीं, बल्कि एक परिवार के पुनर्मिलन की कहानी भी है। आने वाले दिनों में पवार परिवार की ये बंद कमरे की मुलाकातें और फैसले ही महाराष्ट्र की सत्ता और एनसीपी के भविष्य की तस्वीर तय करेंगे। सवाल यही है: क्या पवार परिवार की राजनीति फिर एक साथ लौटेगी और क्या बिखरी हुई एनसीपी एक बार फिर एकजुट हो पाएगी?