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UGC नियम विवाद: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार की बड़ी रणनीति, धर्मेंद्र प्रधान समेत कई मंत्री हुए शामिल

UGC नियम विवाद

देशभर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए आदेशों को लेकर छिड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया, जब सुप्रीम कोर्ट ने नए नियमों पर फिलहाल रोक लगा दी और निर्देश दिया कि पुराने नियम ही लागू रहेंगे। इस बड़े कानूनी घटनाक्रम के बाद अब सरकार ने इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी अगली रणनीति बनाने के लिए कदम उठाए हैं।

यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगने के तुरंत बाद, आगे की कार्रवाई पर विचार करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह उच्च-स्तरीय बैठक सांसद बृजमोहन अग्रवाल के निवास पर हुई। इस बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और खेल मंत्री मनसुख मांडविया सहित कई बड़े नेता शामिल थे। सभी नेताओं ने मिलकर इस बात पर गंभीरता से चर्चा की कि इस विवाद का सही और स्थायी हल कैसे निकाला जाए।

बैठक के समापन के बाद, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी के सभी सांसदों और मंत्रियों ने मिलकर इस विषय पर गहराई से विचार किया है। उन्होंने जोर देकर कहा, “हमारा मुख्य मकसद छात्रों, शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों—सभी के हितों का ध्यान रखना है। किसी भी तरह का फैसला लेने से पहले हर पहलू को देखा जाएगा।”

नेताओं ने स्पष्ट किया कि सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “सबका साथ, सबका विकास” की सोच पर काम कर रही है। उनका मानना है कि शिक्षा से जुड़े फैसले देश के भविष्य से जुड़े होते हैं, इसलिए इस मुद्दे के समाधान में जल्दबाजी नहीं की जाएगी और किसी भी वर्ग के साथ अन्याय नहीं होगा।

फिलहाल यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है, जिसने 13 जनवरी 2026 के नए आदेश पर रोक लगाते हुए कहा है कि अभी 2012 की पुरानी रिपोर्ट ही लागू रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 15 मार्च 2026 को होनी है। इस बीच, इस विवाद ने राजनीतिक मोड़ भी ले लिया है। विपक्ष ने यूजीसी से जुड़ी रिपोर्ट तैयार करने वाली कमेटी के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह के रवैये पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि उन्होंने इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट को गंभीरता से नहीं लिया।

यह यूजीसी मामला अब सिर्फ शैक्षिक नहीं रहा, बल्कि राजनीति और कानून के गलियारों से भी जुड़ गया है। आने वाले समय में सरकार और कोर्ट के फैसले देश के लाखों छात्रों और शिक्षकों की पढ़ाई और भविष्य पर सीधा असर डालेंगे, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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