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मणिपुर में नई सरकार बनने के बाद क्यों भड़का विरोध? चुराचांदपुर में बढ़ा तनाव, पुलिस अलर्ट पर

चुराचांदपुर में बढ़ा तनाव

पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में नई सरकार के गठन के बाद शांति की उम्मीद थी, लेकिन इसके विपरीत, एक बार फिर हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। नई सरकार के फैसलों से नाराज लोगों ने चुराचांदपुर जिले में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिसके चलते राज्य में तनाव का माहौल गहरा गया है। प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है।

मणिपुर में नई सरकार के गठन के कुछ ही दिनों बाद कुकी बहुल चुराचांदपुर इलाके में असंतोष फूट पड़ा है। हाल ही में, बीजेपी नेता युमनाम खेमचंद सिंह ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है और नेमचा किगपेन को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। यह सरकार पूर्व मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह के इस्तीफे के लगभग एक साल बाद बनी है।

विरोध प्रदर्शन और झड़प

गुरुवार शाम तईबोंग बाजार इलाके में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। ये प्रदर्शनकारी नई सरकार के फैसलों और लंबे समय से चली आ रही अलग प्रशासन की मांग को गंभीरता से न लेने से नाराज थे।

विरोध ने जल्द ही उग्र रूप ले लिया। प्रदर्शनकारियों ने सड़कें जाम करने के लिए टायर और लकड़ियां जला दीं। कई जगहों पर पथराव की खबरें भी सामने आईं, जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस और सुरक्षा बलों को भीड़ को हटाने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी।

हालात संभालने के दौरान पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस झड़प में दो लोगों के घायल होने की सूचना है। हालांकि प्रशासन ने बड़ा नुकसान न होने का दावा किया है, लेकिन पूरे इलाके में अब भी स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।

प्रशासन का कड़ा रुख और शांति की अपील

बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने चुराचांदपुर और कांगपोकपी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं। अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए इंटरनेट और सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

राज्य सरकार ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों ने साफ किया है कि किसी भी तरह की हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से संकेत दिए गए हैं कि सभी समुदायों के साथ जल्द ही बातचीत शुरू की जाएगी, ताकि उनकी मांगों और असंतोष को समझा जा सके।

फिलहाल, पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह बातचीत के जरिए इस बढ़ते असंतोष को शांत करे और राज्य में स्थाई शांति बहाल करे।

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