बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव से पहले भारत को लेकर वहां की अंतरिम सरकार का रुख बदलता नजर आ रहा है। बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने हाल ही में स्वीकार किया है कि पिछले कुछ महीनों में भारत के साथ रिश्तों में कुछ तनाव और रुकावटें आई थीं। हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया है कि चुनाव के बाद बनने वाली नई सरकार भारत के साथ संबंधों को एक बार फिर मजबूत करने की दिशा में प्रयास करेगी और लोगों को भारत से निराशा नहीं होनी चाहिए।
विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने अपने बयान में मौजूदा हालात पर विस्तार से बात की। यहां प्रमुख बिंदु दिए गए हैं:
अंतरिम सरकार में रिश्तों में आई सुस्ती: तौहीद हुसैन ने माना कि नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार के दौरान दोनों देशों के संबंधों में रुकावटें आईं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इस दौरान दोनों देशों की प्राथमिकताएं अलग-अलग थीं, जिससे व्यापार और सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों में गति नहीं आ पाई। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस दौरान कोई बड़ा संकट उत्पन्न नहीं हुआ, केवल रिश्तों में सुस्ती रही।
राजनीतिक बदलाव और तनाव का कारण: बांग्लादेश में अगस्त 2024 में हुए बड़े राजनीतिक परिवर्तन के बाद ये रिश्ते बिगड़े, जब छात्रों के विरोध प्रदर्शन के कारण पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार गिर गई। इसके बाद उन्हें देश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी। इस घटना के बाद से ही अंतरिम सरकार ने कई बार शेख हसीना को वापस भेजने की मांग की, जिस पर भारत की सहमति नहीं मिली और इससे दोनों देशों के बीच दूरी और बढ़ गई।
पाकिस्तान से बढ़ी नजदीकियां और मंत्रियों में पलायन का डर: बीते डेढ़ साल में भारत से संबंधों में ठंडापन आया, जबकि पाकिस्तान के साथ बांग्लादेश की नजदीकियां बढ़ी हैं। कूटनीति, व्यापार और खेल के क्षेत्र में पाकिस्तान ने अपने संबंधों को मजबूत किया है। इसी बीच खबर है कि 12 फरवरी के चुनाव से ठीक पहले बांग्लादेश के कई मंत्री और सलाहकार (जैसे वित्त मामलों के मंत्री डॉक्टर सालेहुद्दीन अहमद और मोहम्मद फौजुल कबीर खान) देश छोड़ने की तैयारी में लगे हैं। माना जा रहा है कि उन्हें चुनाव के बाद संभावित कार्रवाई का डर सता रहा है।
नई सरकार से नई शुरुआत की उम्मीद: तौहीद हुसैन ने इन सभी चिंताओं को दूर करते हुए कहा कि आने वाली सरकार भारत के साथ नए सिरे से बातचीत शुरू करेगी। उन्होंने जोर दिया कि भारत और बांग्लादेश पड़ोसी देश हैं और साझा विकास के लिए मिलकर काम करना ही होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि चुनाव के बाद संबंधों में सुधार संभव है।
फिलहाल, बांग्लादेश की 12 फरवरी को होने वाले चुनाव पर पूरे क्षेत्र की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यही चुनाव तय करेगा कि नई सरकार की नीतियां भारत-बांग्लादेश के सदियों पुराने रिश्तों को किस दिशा में ले जाएंगी—मजबूती की ओर या दूरी की ओर।









