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मथुरा में धूमधाम से मनाया गया मां यशोदा का जन्मोत्सव, भक्ति और वात्सल्य में सराबोर हुआ ब्रज क्षेत्र

मथुरा के यशोदा धाम में मां यशोदा के जन्मोत्सव का भव्य दृश्य और बधाई गान समारोह।

मथुरा के नंदगांव में स्थित प्रसिद्ध नंद बाबा मंदिर और मेहराना स्थित यशोदा धाम में हाल ही में भगवान श्रीकृष्ण की पालनहार मां यशोदा का जन्मोत्सव बड़े ही भक्तिभाव और धूमधाम से मनाया गया। इस पावन अवसर पर पूरा ब्रज क्षेत्र वात्सल्य, प्रेम और उल्लास के रंगों में सराबोर हो गया। यह उत्सव सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मां और संतान के पवित्र रिश्ते का अद्भुत प्रतीक है, जिसे देखने के लिए दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

जन्मोत्सव के मौके पर द्वापर युग की परंपराओं का निर्वहन करते हुए नंदगांव से गोस्वामी समाज परंपरा अनुसार मेहराना स्थित यशोदा धाम बधाई देने के लिए पहुंचा। गोस्वामियों द्वारा सामूहिक बधाई गान किया गया, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों और भव्य सजावट से सजाया गया। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भजनों का आयोजन किया गया, तथा परंपरा के अनुसार छप्पन भोग भी मां यशोदा को अर्पित किया गया। भक्तों ने मां यशोदा के चरणों में शीश नवाकर संतान सुख, पारिवारिक समृद्धि और सुख-शांति की कामना की।

यशोदा कुंड का महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां यशोदा का जन्म नंदगांव के पास मेहराना में हुआ था, जिस कारण यह स्थान ब्रज संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। मेहराना स्थित यशोदा मंदिर से जुड़े कुलदीप कौशिक ने बताया कि यहाँ स्थित यशोदा कुंड का धार्मिक दृष्टि से बड़ा महत्व है। मान्यता है कि मां यशोदा इसी पवित्र कुंड में भगवान श्रीकृष्ण और बलराम को प्रतिदिन स्नान कराती थीं और उनके बाल्यकाल के वस्त्र भी यहीं धोती थीं। यह कुंड भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं और मां के वात्सल्य प्रेम का जीवंत प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि खेल-कूद के बाद बाल कृष्ण और बलराम के शुद्धिकरण के लिए इसी पवित्र जल का उपयोग किया जाता था।

कुल मिलाकर, मां यशोदा का जन्मोत्सव ब्रज की उस संस्कृति का दर्पण है, जिसमें भक्ति, वात्सल्य और प्रेम का अनूठा संगम देखने को मिलता है, जिसने सभी उपस्थित श्रद्धालुओं के मन को भाव-विभोर कर दिया।

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