बिहार के लाल, 14 साल के वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास! गांव से विश्व कप तक का सफर

14 साल के वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास
14 साल के वैभव सूर्यवंशी ने रचा इतिहास

क्रिकेट की दुनिया में आए दिन नए रिकॉर्ड बनते हैं, लेकिन बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर गांव के 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने जिस तरह से अपनी पहचान बनाई है, वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। छोटी उम्र में बड़े सपने देखने वाले इस युवा खिलाड़ी ने अपने अथक प्रयास और परिवार के बलिदान से क्रिकेट जगत को चकित कर दिया है और वर्तमान में वह इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के लिए तैयारी कर रहे हैं।

वैभव के इस असाधारण सफर की शुरुआत तब हुई जब वह सिर्फ 8 साल के थे। उनके पिता संजीव सूर्यवंशी ने तय किया कि बेटे को क्रिकेटर बनाना है। हर दूसरे दिन, सुबह 4 बजे, पिता और पुत्र 90 किलोमीटर की यात्रा तय करके पटना की जेननेक्स क्रिकेट अकादमी (संपटचक) पहुंचते थे। यह यात्रा कभी बस से, तो कभी कार से पूरी की जाती थी। इस कठिन परिश्रम का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वैभव के लिए एक टिफिन के साथ, बाकी गेंदबाजों के लिए 9 अतिरिक्त टिफिन ले जाए जाते थे जो नेट्स में उन्हें गेंदबाज़ी करते थे। पटना के बड़े मैदानों पर वे राज्य के अंडर-19 खिलाड़ियों के साथ नेट्स खेलते रहे, लेकिन कभी हार नहीं मानी।

U-19 विश्व कप में बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड

पिता-पुत्र की यह तपस्या 6 फरवरी 2026 को रंग लाई, जब हरारे में आईसीसी अंडर-19 विश्व कप का फाइनल खेला गया। इंग्लैंड के खिलाफ वैभव ने मात्र 80 गेंदों में 175 रन की ऐतिहासिक पारी खेलकर तहलका मचा दिया। इस पारी में 15 चौके और 15 छक्के शामिल थे। यह अंडर-19 विश्व कप फाइनल का अब तक का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर है। भारत ने यह मैच 100 रनों से जीतकर छठी बार खिताब अपने नाम किया और वैभव ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ तथा ‘प्लेयर ऑफ द फाइनल’ घोषित हुए।

IPL में सबसे युवा डेब्यू और अब बोर्ड परीक्षा की तैयारी

यह युवा सनसनी अब इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में भी चमक बिखेर रही है। 14 साल के वैभव सूर्यवंशी को राजस्थान रॉयल्स ने साइन किया है और वह IPL 2025 में सबसे युवा डेब्यूटेंट बने थे। अब जब वह IPL 2026 की तैयारी कर रहे हैं, तो इससे पहले उनकी प्राथमिकता अलग है – बिना कोई विशेष छूट लिए 10वीं बोर्ड परीक्षा देना। वैभव की कहानी साबित करती है कि सच्चे लगन और मेहनत से गांव से विश्व कप तक का सफर तय किया जा सकता है।

बिहार के ताजपुर का यह लाल आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है, जो यह दर्शाता है कि सपने बड़े हों या छोटे, सच्ची मेहनत से हर मंजिल हासिल की जा सकती है।

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