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हिंदू नववर्ष की शुरुआत, जानें इसका महत्व और क्या करें-क्या न करें

सनातन धर्म में हिंदू नववर्ष का विशेष महत्व माना जाता है. हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है और इसी दिन से हिंदू नववर्ष का आगाज होता है. मान्यता है कि इसी तिथि से ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना शुरू की थी. इस वर्ष 19 मार्च से विक्रम संवत 2083 प्रारंभ हो गया है.

देशभर में अलग-अलग नामों से उत्सव
हिंदू नववर्ष को देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग नामों से मनाया जाता है. कहीं इसे गुड़ी पड़वा, कहीं उगादि और कहीं चेटीचंड के रूप में मनाया जाता है. नाम भले अलग हों, लेकिन सभी का उद्देश्य एक ही होता है—नई शुरुआत, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में खुशियों का स्वागत करना.

संवत 2083 का ज्योतिषीय महत्व
इस वर्ष संवत 2083 के राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल माने गए हैं. बृहस्पति के प्रभाव से धर्म, शिक्षा और कानून के क्षेत्रों में सुधार की संभावना है. वहीं मंगल के मंत्री होने से आम लोगों को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जैसे दुर्घटनाएं या तनाव की स्थिति. मेघेश चंद्रमा होने से वर्षा सामान्य से बेहतर रहने के संकेत हैं.

नववर्ष के दिन क्या न करें
हिंदू नववर्ष के पहले दिन कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है. इस दिन नकारात्मकता, रोना-धोना, गुस्सा या शिकायत से दूर रहना चाहिए. मान्यता है कि साल का पहला दिन जैसा बीतता है, पूरे वर्ष पर उसका असर पड़ता है.

अशुभ वस्तुओं और नशे से दूरी
नववर्ष के दिन किसी को अशुभ वस्तुएं जैसे चाकू या धारदार सामान उपहार में न दें और न ही खरीदें. साथ ही मादक पदार्थों और तामसिक भोजन से भी परहेज करना चाहिए, क्योंकि इसका असर पूरे साल के व्यवहार पर पड़ सकता है.

सम्मान और संयम रखें
इस दिन किसी का अपमान या कटु वचन बोलने से बचें. क्रोध पर नियंत्रण रखें और अपने पर्स, तिजोरी या लॉकर को खाली न रखें. मान्यता है कि ऐसा करने से माता लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं और जीवन में बाधाएं आ सकती हैं।