ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहा संघर्ष तीन हफ्ते पार कर चुका है, लेकिन हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस बीच अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला गया, तो वह ईरान के कई पावर प्लांट्स पर हमला करेगा। अमेरिका ने साफ किया है कि कार्रवाई की शुरुआत सबसे बड़े संयंत्र से की जाएगी।
तेल आपूर्ति पर असर, कीमतों में उछाल
यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी धमकाने के कारण को लेकर तनाव बढ़ गया है और वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है। यह जलमार्ग दुनिया की करीब 20% तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है। अमेरिकी नेतृत्व ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर वह इस मार्ग को सुरक्षित किए बिना भी अपने फैसले ले सकता है।
ईरान की जवाबी चेतावनी, बढ़ सकता है संकट
अमेरिका की चेतावनी पर ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है। ईरान ने कहा कि अगर उसके पावर प्लांट्स को निशाना बनाया गया, तो वह अमेरिका, इजराइल और उनके सहयोगी देशों के एनर्जी, आईटी और खासतौर पर डिसैलिनेशन प्लांट्स पर हमला करेगा। इससे जंग का असर तेल से आगे बढ़कर पानी की सप्लाई तक पहुंच सकता है।
डिसैलिनेशन प्लांट्स की अहमियत
गल्फ देशों में जहां तेल की भरमार है, वहीं पीने के पानी की भारी कमी है। ऐसे में डिसैलिनेशन प्लांट्स समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य बनाकर लोगों की जरूरतें पूरी करते हैं। सऊदी अरब अपनी लगभग 70% पानी की जरूरत इन्हीं प्लांट्स से पूरी करता है, जबकि कुवैत 90%, ओमान 86% और यूएई भी बड़े स्तर पर इन पर निर्भर हैं।
पानी संकट बन सकता है सबसे बड़ा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन प्लांट्स को निशाना बनाया गया, तो कुछ ही दिनों में कई शहरों में पानी की भारी कमी हो सकती है। तेल संकट से भी ज्यादा गंभीर स्थिति पानी की सप्लाई रुकने से पैदा हो सकती है, क्योंकि इसके बिना जीवन पूरी तरह ठप हो सकता है। ये सब देखकर दुनिया डर गई है कि कहीं पारंपरिक युद्ध न्यूक्लियर वॉर तक न पहुंच जाए।









