नॉर्थ कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग उन ने देश के पास परमाणु हथियार होने पर संतोष जताया है। सरकारी मीडिया के अनुसार उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमले यह साबित करते हैं कि परमाणु हथियार रखने का उनका फैसला बिल्कुल सही था।
मजबूत सैन्य ताकत को बताया सबसे जरूरी
संसद में दिए लंबे भाषण में किम ने कहा कि आज की दुनिया में सिर्फ मजबूत सैन्य ताकत ही किसी देश को सुरक्षित रख सकती है। उन्होंने साफ कहा कि कमजोर देशों को बाहरी खतरे का सामना करना पड़ता है।
परमाणु ताकत को और बढ़ाने का ऐलान
किम जोंग उन ने कहा कि वह अपने देश की परमाणु क्षमता को और मजबूत करेंगे। उनका उद्देश्य अमेरिका को रोकना और देश की सुरक्षा को और मजबूत करना है। उन्होंने यह भी कहा कि 2019 में ट्रम्प के साथ बातचीत टूटने के बाद परमाणु हथियार बढ़ाने का फैसला उनका सबसे सही कदम था। उन्होंने संकेत दिया कि नॉर्थ कोरिया अब अमेरिका के खिलाफ मोर्चे पर और सक्रिय भूमिका निभाएगा। हालांकि उन्होंने सीधे नाम नहीं लिया, लेकिन यह जरूर कहा कि शांति या टकराव का फैसला विरोधी देशों पर निर्भर करता है।
आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था और रक्षा पर जोर
किम ने देश को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ ज्यादा परमाणु हथियार और मिसाइलें तैयार करने पर जोर दिया। उनका कहना है कि मजबूत रक्षा क्षमता के कारण ही देश आर्थिक विकास पर भी ध्यान दे पा रहा है।
दक्षिण कोरिया को बताया दुश्मन
किम ने साउथ कोरिया को सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए सख्त चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी कदम देश की सुरक्षा के खिलाफ हुआ, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बेअसर
अमेरिका और उसके सहयोगी देश लंबे समय से नॉर्थ कोरिया को परमाणु कार्यक्रम छोड़ने के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक इसमें सफलता नहीं मिली है। किम का कहना है कि बातचीत तभी संभव है, जब नॉर्थ कोरिया को परमाणु शक्ति के रूप में मान्यता मिले।
मिसाइल ताकत से बढ़ी वैश्विक चिंता
नॉर्थ कोरिया ने हाल के वर्षों में कई बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया है, जिनमें लंबी दूरी की ICBM मिसाइलें भी शामिल हैं। ह्वासोंग-15, 17 और 18 जैसी मिसाइलें अमेरिका तक पहुंचने में सक्षम मानी जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार देश के पास दर्जनों परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइलें हो सकती हैं।
आने वाले समय में और बढ़ेगा तनाव
किम जोंग उन के इस बयान के बाद वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। उनका यह रुख संकेत देता है कि आने वाले समय में नॉर्थ कोरिया अपनी सैन्य ताकत को और तेज़ी से बढ़ा सकता है।









