मिडिल ईस्ट में तनाव कम होता नजर नहीं आ रहा है और ईरान की केंद्रीय सैन्य कमान ने साफ कहा है कि अगर उसके नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया गया, तो वह उससे भी ज्यादा विनाशकारी जवाब देगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका की ओर से ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की धमकी दी गई है।
45 दिन के युद्धविराम पर चर्चा
नई रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थों के बीच 45 दिन के संभावित युद्धविराम को लेकर बातचीत चल रही है। मध्यस्थ देश इस सीजफायर को लागू कराने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि आगे स्थायी शांति का रास्ता खुल सके।
संघर्ष टालने का आखिरी मौका
सूत्रों के अनुसार, अगले 48 घंटों में किसी बड़े समझौते की संभावना कम है, लेकिन यह बातचीत बेहद अहम मानी जा रही है। इसे बड़े स्तर के संघर्ष को रोकने का आखिरी मौका भी बताया जा रहा है।
बढ़ सकता है बड़ा टकराव
अगर बातचीत विफल होती है, तो हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं। ईरान के नागरिक ठिकानों पर हमले और खाड़ी देशों के ऊर्जा संसाधनों पर जवाबी कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने का खतरा है।
ट्रंप की सख्त चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि अगर उनकी शर्तें पूरी नहीं हुईं, तो वह बड़ा हमला करेंगे। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की भी मांग की है।
सोशल मीडिया पर धमकी भरे पोस्ट
ट्रंप ने अपने सोशल प्लेटफॉर्म पर चेतावनी देते हुए लिखा कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो भारी तबाही देखने को मिलेगी। उन्होंने एक तय समय सीमा भी दी है, जिसके भीतर फैसला लेने को कहा गया है।
‘समझौता नहीं तो तबाही’
एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि समझौते की संभावना है, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो “सब कुछ उड़ा दिया जाएगा।” यह बयान इस पूरे संघर्ष को और ज्यादा गंभीर बना रहा है।
दुनिया की नजर इस वार्ता पर
अब पूरी दुनिया की नजर इस संभावित सीजफायर पर टिकी है। अगर समझौता हो जाता है, तो यह शांति की दिशा में बड़ा कदम होगा, लेकिन विफलता की स्थिति में बड़ा युद्ध छिड़ सकता है।






