जयपुर में पैरामेडिकल परीक्षा में नकल कराने वाले बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। पुलिस ने कॉलेज संचालक समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने 45 छात्रों को पास कराने के लिए 5.50 लाख रुपये का सौदा किया था, मामले के बाद परीक्षा केंद्र पर हंगामा हुआ, परीक्षाएं रद्द कर दी गईं और पुलिस अब पूरे नेटवर्क व अन्य आरोपियों की जांच में जुटी है।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में पैरामेडिकल परीक्षा के दौरान नकल कराने के एक बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। इस मामले में पुलिस ने दो कॉलेजों से जुड़े चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक कॉलेज संचालक, एक एचओडी, एक लेक्चरर और संचालक का रिश्तेदार शामिल है।
जांच में सामने आया है कि झुंझुनूं के एक कॉलेज के 45 छात्रों को परीक्षा में पास कराने के लिए 5.50 लाख रुपये का सौदा किया गया था।
मामला सामने आने के बाद परीक्षा केंद्र पर मौजूद अन्य छात्रों में भारी नाराजगी देखने को मिली, छात्रों ने कॉलेज परिसर के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया, नारेबाजी की और तोड़फोड़ भी की, स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा, बढ़ते विवाद को देखते हुए राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल ने प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज परीक्षा केंद्र की परीक्षाएं अगले आदेश तक रद्द कर दी हैं।
डीसीपी (वेस्ट) प्रशांत किरण के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में झुंझुनूं के मुकुंदगढ़ स्थित एस. करण कॉलेज के एचओडी कृष्ण कुमार, लेक्चरर शंकर लाल जाट, जयपुर के प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज के संचालक रामकृष्ण मंडीवाल और उनके भतीजे देवकृष्ण मंडीवाल शामिल हैं। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि एस. करण कॉलेज के 45 प्रथम वर्ष के छात्रों की बैक लगी हुई थी। इन छात्रों को पास कराने के लिए जयपुर के परीक्षा केंद्र पर नकल कराने की पूरी योजना बनाई गई थी। सभी छात्रों को एक ही कमरे में बैठाने का प्लान था, जहां ड्यूटी पर मौजूद इनविजिलेटर की मदद से उन्हें परीक्षा के दौरान उत्तर उपलब्ध कराए जाने थे।
इस पूरे मामले का खुलासा पुलिस कंट्रोल रूम को मिली एक गुप्त सूचना के बाद हुआ। सूचना मिलने पर डीएसटी टीम ने जांच शुरू की और प्रताप नगर से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। उनके बैग से बरामद डायरी में छात्रों के नाम और उनसे वसूली गई रकम का पूरा हिसाब दर्ज मिला, जिसने पूरे रैकेट का पर्दाफाश कर दिया।

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन की व्हाट्सएप चैट भी खंगाली। चैट में परीक्षा देने वाले छात्रों के एडमिट कार्ड और परीक्षा केंद्र से जुड़े दस्तावेज साझा किए गए थे। आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि 45 छात्रों से कुल 5.50 लाख रुपये लिए गए थे। इनमें से 3.27 लाख रुपये परीक्षा केंद्र पर मनचाहा इनविजिलेटर लगाने और नकल की व्यवस्था कराने के लिए कॉलेज संचालक तक पहुंचाए गए थे।
पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि इस तरह की साजिश में और कितने लोग शामिल थे तथा क्या पहले भी इसी तरह छात्रों को परीक्षा में अवैध तरीके से पास कराया गया था। दूसरी ओर, परीक्षा रद्द होने से ईमानदारी से परीक्षा देने वाले छात्रों में भी नाराजगी है, क्योंकि उन्हें अब दोबारा परीक्षा का इंतजार करना पड़ेगा।


