राजस्थान में सड़क हादसों के बाद वाहनों में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। दौसा बस हादसे में 8 लोगों की मौत के बाद जैसलमेर, भांकरोटा और बाड़मेर जैसे पुराने दर्दनाक हादसे फिर चर्चा में आ गए हैं, लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने सड़क सुरक्षा, वाहन फिटनेस और आपातकालीन बचाव व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जयपुर: राजस्थान में सड़क हादसों के बाद वाहनों में आग लगने की घटनाएं लगातार चिंता का विषय बनती जा रही हैं, बुधवार तड़के दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण बस हादसे में आठ लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर राज्य में पिछले कुछ वर्षों के उन भयावह हादसों की याद ताजा कर दी, जिनमें दर्जनों लोगों ने आग की लपटों में अपनी जान गंवाई थी।
दौसा में बस हादसा, आठ लोगों की मौत
बुधवार सुबह दौसा जिले में एक बस की ट्रक से टक्कर हो गई, टक्कर के बाद बस में भीषण आग लग गई, जिसने देखते ही देखते पूरे वाहन को अपनी चपेट में ले लिया, हादसे में आठ यात्रियों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं, हादसे के बाद हाईवे पर अफरा-तफरी मच गई और राहत-बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया।
भांकरोटा गैस टैंकर हादसे ने दहला दिया था राजस्थान
दिसंबर 2024 में जयपुर-अजमेर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भांकरोटा में एलपीजी गैस से भरे टैंकर की टक्कर के बाद भीषण विस्फोट हुआ था, हादसे के बाद टैंकर के साथ-साथ आसपास चल रहे कई वाहन भी आग की चपेट में आ गए थे, इस दुर्घटना में 13 लोगों की मौत हो गई थी, कई लोग अपने वाहनों से बाहर निकलने का मौका तक नहीं पा सके और जिंदा जल गए।
जैसलमेर बस अग्निकांड बना सबसे बड़ा हादसा
भांकरोटा हादसे के कुछ समय बाद जैसलमेर जिले में यात्रियों से भरी एक बस में भीषण आग लग गई थी, बस जैसलमेर से जोधपुर जा रही थी, तभी थईयात गांव के पास अचानक आग भड़क उठी, आग इतनी तेजी से फैली कि यात्रियों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला और 21 से अधिक लोगों की दर्दनाक मौत हो गई,बाद में जांच में बस की बॉडी निर्माण और सुरक्षा मानकों से जुड़ी कई गंभीर खामियां सामने आई थीं, सरकार ने कार्रवाई भी की, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा और वाहन मानकों के पालन में अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं।
बाड़मेर हादसे में चार दोस्त जिंदा जले
बाड़मेर में भी एक दर्दनाक सड़क हादसे के बाद कार में आग लगने से चार दोस्तों की मौत हो गई थी, हादसे के बाद वाहन के दरवाजे नहीं खुल सके, जिससे सभी अंदर ही फंस गए और जिंदा जल गए, घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शवों की पहचान करना भी मुश्किल हो गया था।
लगातार बढ़ रही चिंता
राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सड़क दुर्घटनाओं के बाद वाहनों में आग लगने की कई गंभीर घटनाएं सामने आई हैं, विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन, वाहनों की नियमित तकनीकी जांच, आपातकालीन निकासी व्यवस्था और अग्नि सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता ऐसी घटनाओं में जान-माल के नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
दौसा की ताजा घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा, वाहन फिटनेस और आपातकालीन प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।


