राम मंदिर चढ़ावा हेराफेरी मामले में जांच तेज हो गई है, पुलिस और एसआईटी ने बैंक तक रकम पहुंचाने वाले कर्मचारियों समेत सभी संबंधित लोगों की आय, संपत्ति और भूमिका की जांच शुरू कर दी है।
अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी की जांच लगातार तेज होती जा रही है। पुलिस और एसआईटी ने अब जांच का दायरा बढ़ाते हुए सिर्फ मुख्य आरोपियों तक ही नहीं, बल्कि पूरी चढ़ावा गणना और बैंक जमा प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारियों को भी जांच के घेरे में ले लिया है।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने गणना कक्ष में कार्यरत सभी कर्मचारियों से उनकी आय, खर्च और संपत्ति का विस्तृत विवरण लिखित रूप में मांगा है। मंगलवार को कई कर्मचारियों ने अपना आर्थिक ब्योरा अधिकारियों को सौंपना भी शुरू कर दिया। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं पिछले कुछ समय में किसी कर्मचारी की आर्थिक स्थिति में असामान्य बदलाव तो नहीं आया।
बैंक तक रकम पहुंचाने वाले कर्मचारी भी जांच के घेरे में
जांच अब उन कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों तक भी पहुंच गई है, जो गणना कक्ष से नोटों के बक्से बैंक तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाते थे। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में निर्देश दिया है कि चढ़ावे की पूरी प्रक्रिया से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की गहन जांच की जाए, ताकि किसी भी संभावित लापरवाही या मिलीभगत का पता लगाया जा सके।
44 कर्मचारियों की भूमिका की हो रही जांच
जानकारी के मुताबिक, श्रद्धालुओं द्वारा दान में दिए गए नकद और बहुमूल्य धातुओं की गणना का कार्य कुल 44 कर्मचारी करते थे। इनमें से सात मुख्य आरोपी पहले ही गिरफ्तार होकर जेल भेजे जा चुके हैं। अब पुलिस बाकी कर्मचारियों की भूमिका, उनकी आर्थिक स्थिति और पिछले दो वर्षों में उनकी संपत्ति में हुए बदलाव की भी जांच कर रही है।
संपत्तियों और बैंक लेनदेन की पड़ताल
जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि आरोपियों ने पिछले दो वर्षों में कितनी और कहां-कहां संपत्तियां खरीदीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कथित तौर पर चढ़ावे की कुल कितनी राशि का गबन हुआ। जून में मामला सामने आने के बाद बैंक में हुए सभी लेनदेन का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है।
ट्रस्ट की जिम्मेदारियों की भी होगी समीक्षा
पुलिस जांच में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों और संभावित प्रशासनिक लापरवाही की भी समीक्षा की जा रही है। इसके अलावा गणना कक्ष के बाहर तैनात निजी सुरक्षा गार्डों से भी पूछताछ कर पूरी प्रक्रिया की जानकारी जुटाई जा रही है, फिलहाल पुलिस और एसआईटी का फोकस यह पता लगाने पर है कि कथित हेराफेरी में किन-किन लोगों की भूमिका रही और क्या किसी कर्मचारी की बढ़ी हुई आर्थिक स्थिति का संबंध इस मामले से जुड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।


