आतंकी उमर नबी और जैश-ए-मोहम्मद मॉड्यूल में विचारधारा और फंडिंग पर विवाद सामने आया

मुख्य बिंदु

  • दिल्ली कार ब्लास्ट में नए तथ्य सामने आए
  • उमर नबी आदिल राथर की शादी में शामिल नहीं हुआ
  • आतंकी समूह में विचारधारा और फंड को लेकर मतभेद थे
  • उमर नबी 2023 से आईईडी (IED) पर काम कर रहा था
  • 26 लाख रुपये का फंड हमले में इस्तेमाल हुआ

Delhi Red Fort Blast : दिल्ली कार ब्लास्ट की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए तथ्य सामने आ रहे हैं। ताजा जानकारी के अनुसार आतंकी उमर नबी अपने सहयोगी आदिल राथर की शादी में शामिल नहीं हुआ था। जांच में यह भी पता चला है कि जैश-ए-मोहम्मद के इस आतंकी मॉड्यूल में विचारधारा, फंडिंग और हमला करने की रणनीति को लेकर आपसी मतभेद थे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इन वजहों से आतंकी डॉ. उमर नबी अक्टूबर में अपने साथी आदिल राथर की शादी में शामिल नहीं हुआ, हालांकि, जब मौलवी मुफ्ती इरफान वागे को गिरफ्तार कर लिया गया तो उमर 18 अक्टूबर को कश्मीर के काजीगुंड पहुंचा और आतंकी समूह के बाकी सदस्यों के साथ अपने संबंध सुधारने की कोशिश की।

आतंकी समूह में विचारधारा का मतभेद

सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार आतंकी मुजम्मिल गनई, आदिल और मौलवी मुफ्ती इरफान आतंकी उमर नबी की विचारधारा से सहमत नहीं थे। हालांकि यह समूह अधिकार अल-कायदा की विचारधारा से प्रभावित था। उमर नबी आईएसआईएस से प्रेरित था और उसे ही अपना मॉडल मानता था। जहां अल-कायदा पश्चिम देशों और दूर के दुश्मनों पर हमलों पर जोर देता है, वहीं आईएसआईएस का उद्देश्य खिलाफत स्थापित करना और पास के टारगेट पर हमला करना होता है।

2023 से आईईडी पर कर रहा था शोध

सूत्रों के अनुसार, आतंकी मौलवी मुफ्ती को छोड़कर सभी ने अफगानिस्तान जाने का प्रयास किया, लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो पाए। इसलिए उन्होंने अपने ही देश में संभावित टारगेट खोजने का निर्णय लिया। आतंकी उमर नबी खुद को कश्मीर में बुरहान वानी और जाकिर मूसा की विरासत का उत्तराधिकारी मानता था। जांचकर्ताओं ने बताया कि वह 2023 से आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) पर शोध कर रहा था।

धन के इस्तेमाल को लेकर विवाद

आतंकी समूह में धन के इस्तेमाल को लेकर विवाद था, जिसमें उमर की जवाबदेही कम थी। दिल्ली कार ब्लास्ट काजीगुंड बैठक के तीन हफ्ते बाद हुआ, जहां उमर ने बाकी आतंकियों के साथ सुलह की थी। आतंकी मुजम्मिल गनई ने बताया कि पांच डॉक्टरों ने मिलकर 26 लाख रुपये का फंड जुटाया, जिसे शहरों में हमलों और विस्फोटक उपकरण खरीदने में इस्तेमाल किया गया। गनई ने 5 लाख, आदिल और अहमद राथर ने 8 और 6 लाख, डॉक्टर शाहीन ने 5 लाख और उमर नबी ने 2 लाख रुपये दिए।

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