उत्तर प्रदेश के आगरा में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक बेहद खतरनाक और नया तरीका अपनाया है, जिसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) नाम दिया जा रहा है। अपराधियों ने एक रिटायर्ड शिक्षक को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने का डर दिखाकर उनकी जीवन भर की जमा पूंजी 20 लाख रुपये हड़प ली। यह घटना बताती है कि कैसे शातिर ठग अब भय और गोपनीयता का हथियार बनाकर लोगों को ऑनलाइन भुगतान करने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
पीड़ित की पहचान थाना सैया के बिरहरू गांव निवासी हरिश्चंद्र अग्रवाल (रिटायर्ड शिक्षक) के रूप में हुई है। ठगों ने हरिश्चंद्र अग्रवाल को वीडियो कॉल किया और उन्हें यह कहकर डराया कि वह मनी लॉन्ड्रिंग के एक गंभीर मामले में फंस गए हैं। अपराधियों ने उन्हें विश्वास दिलाया कि उनके आधार कार्ड से लिंक खाते में 6 करोड़ 80 लाख रुपये का एक बड़ा अवैध लेनदेन हुआ है और अब उनकी गिरफ्तारी तय है।
आरोपियों ने हरिश्चंद्र जी पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि जांच बेहद गोपनीय है और अगर उन्होंने किसी को, खासकर अपने परिवार को इस बारे में बताया, तो वे सभी मुसीबत में फंस जाएंगे। जेल जाने के डर से भयभीत हरिश्चंद्र अग्रवाल पर आरोपियों ने प्रतिदिन वीडियो कॉल करके दबाव बनाए रखा। इस दबाव के चलते पीड़ित ने अपनी पूरी जमा पूंजी गंवा दी। उन्होंने 26 दिसंबर को 15 लाख रुपये और 30 दिसंबर को 5 लाख रुपये आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दिए, जो कुल मिलाकर 20 लाख रुपये थे।
यह धोखाधड़ी तब सामने आई जब पीड़ित के बेटे को इस पूरे मामले की जानकारी हुई। बेटे ने तुरंत एक्शन लिया और थाना साइबर क्राइम में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। साइबर पुलिस अब इस हाई-प्रोफाइल डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड की जांच कर रही है और ठगों की पहचान करने में जुटी है।
यह घटना वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक बड़ी चेतावनी है। साइबर पुलिस ने अपील की है कि किसी भी सरकारी एजेंसी के नाम पर आने वाली संदिग्ध वीडियो कॉल या धमकी को गंभीरता से न लें और तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को रिपोर्ट करें।









