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AIIMS गोरखपुर में जटिल ‘बर्ड फेस डिफॉर्मिटी’ सर्जरी सफल, 22 वर्षीय युवक को मिली नई जिंदगी

एम्स गोरखपुर में बर्ड फेस डिफॉर्मिटी से पीड़ित युवक

एम्स गोरखपुर के चिकित्सकों ने एक बेहद जटिल और दुर्लभ ‘बर्ड फेस डिफॉर्मिटी’ से पीड़ित 22 वर्षीय युवक की सफल सर्जरी कर उसे नई जिंदगी दी है। यह ऑपरेशन न केवल चिकित्सकीय दृष्टि से चुनौतीपूर्ण था, बल्कि मरीज के जीवन की गुणवत्ता को पूरी तरह बदलने वाला साबित हुआ।

कुशीनगर निवासी युवक बचपन से जन्मजात विकृति से जूझ रहा था। करीब सात वर्ष की उम्र में उसके दोनों ओर के जबड़े की हड्डियां खोपड़ी से जुड़ गई थीं, जिससे निचला जबड़ा विकसित नहीं हो पाया। उसका मुंह लगभग बंद हो गया था, चेहरा असंतुलित होकर चिड़िया जैसा दिखने लगा था और वह ठीक से भोजन भी नहीं कर पाता था। 13 वर्ष की उम्र में एक निजी अस्पताल में सर्जरी के बावजूद समस्या दोबारा उभर आई। सोते समय सांस लेने में परेशानी और तेज खर्राटों की शिकायत बढ़ती जा रही थी। जांच के बाद दंत रोग विभाग के मैक्सिलोफेशियल सर्जन एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शैलेश कुमार ने दो चरणों में ऑर्थोग्नाथिक फेशियल सर्जरी का निर्णय लिया।

पहले चरण में गैप आर्थोप्लास्टी के माध्यम से खोपड़ी से जुड़ी हड्डी को अलग कर निचले जबड़े के विकास की प्रक्रिया शुरू की गई। इंट्राओरल डिस्ट्रैक्टर ऑस्टियोजेनेसिस तकनीक से विशेष उपकरण लगाकर प्रतिदिन लगभग एक मिलीमीटर जबड़े को आगे बढ़ाया गया, जिससे नई हड्डी का निर्माण हुआ और सांस लेने में सुधार आया। दूसरे चरण में डिस्ट्रैक्टर हटाकर एंकिलोज्ड मास को सावधानीपूर्वक निकाला गया और चेहरे की नसों को सुरक्षित रखते हुए जबड़े का आकार संतुलित किया गया। कान के पास छोटे चीरे से करीब पांच घंटे चली सर्जरी के बाद चेहरे का अनुपात सामान्य हुआ।

इस जटिल ऑपरेशन में बहु-विषयक टीम की अहम भूमिका रही। संस्थान की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता और दंत रोग विभागाध्यक्ष डॉ. श्रीनिवास ने टीम को बधाई दी। सर्जरी का नेतृत्व डॉ. शैलेश कुमार ने किया। एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष शर्मा के मार्गदर्शन में डॉ. सीमा और डॉ. आशुतोष ने बेहोशी और श्वसन प्रबंधन संभाला। नर्सिंग ऑफिसर पंकज और प्रतिभा ने ऑपरेशन थिएटर व पोस्ट-ऑप देखभाल में सहयोग किया। सीनियर रेजीडेंट डॉ. प्रवीण कुमार तथा जूनियर रेजीडेंट डॉ. सुमित, डॉ. सौरभ और डॉ. प्रियंका त्रिपाठी भी टीम का हिस्सा रहे।

चिकित्सकों के अनुसार यह सर्जरी केवल सौंदर्य सुधार नहीं, बल्कि भोजन, सांस और जबड़े की सामान्य कार्यक्षमता बहाल करने के लिए की गई थी—और इसकी सफलता ने युवक के सामान्य जीवन की राह आसान कर दी है।