असम में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुँच गया है। कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा संकट तब खड़ा हुआ जब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने अचानक इस्तीफे का ऐलान कर दिया। 32 साल तक कांग्रेस का हाथ थामे रहने वाले बोरा के इस कदम से राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया। घंटों चले हाई-वोल्टेज ड्रामा के बाद भी सस्पेंस बरकरार है कि बोरा का अगला कदम क्या होगा, क्योंकि उन्होंने अभी अंतिम फैसला लेने के लिए और समय मांगा है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयान की हो रही है। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सरमा ने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि उनकी भूपेन बोरा से फोन पर बात हुई है। सरमा के मुताबिक, बोरा ने उन्हें आज शाम 7 बजे अपने आवास पर चाय के लिए आमंत्रित किया है।
बीजेपी ने भुनाया मौका, सरमा का तंज:
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने तंज कसते हुए कहा, “मुझे नहीं लगता कि उन्होंने (बोरा) इस्तीफा वापस लिया है, वरना वो मुझे न्योता क्यों देते?” सरमा ने भूपेन बोरा को असम कांग्रेस का ‘आखिरी हिंदू नेता’ बताते हुए यह भी कहा कि उनके लिए बीजेपी के दरवाजे हमेशा खुले हैं और पार्टी उन्हें एक ‘सेफ सीट’ से चुनाव जिताने का वादा करती है।
कांग्रेस नेतृत्व की मनुहार और भूपेन बोरा का रुख:
इस्तीफे की खबर मिलते ही कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व तुरंत हरकत में आ गया। पार्टी के प्रदेश प्रभारी जितेंद्र सिंह ने दावा किया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और खुद राहुल गांधी ने बोरा से करीब 15 मिनट तक बात की। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई, प्रद्युत बोरदोलोई और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया जैसे दिग्गज नेता बोरा को मनाने उनके घर पहुँचे। देर शाम जितेंद्र सिंह ने यह कहकर राहत की सांस ली कि बोरा ने इस्तीफा वापस ले लिया है।
हालांकि, इन दावों के विपरीत भूपेन बोरा ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है। बोरा ने कहा, “मैंने कल सुबह तक का समय मांगा है ताकि मैं अपने परिवार और शुभचिंतकों से बात कर सकूं।” मुख्यमंत्री के घर आने के सवाल पर, भूपेन बोरा ने इसे ‘गर्व की बात’ कहा, लेकिन साथ ही उन्होंने सरमा के पुराने कांग्रेस छोड़ने के दिनों की याद दिलाते हुए पार्टी की आंतरिक राजनीति पर सवाल भी उठाए।
दो बार विधायक रह चुके और हाल तक प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके भूपेन बोरा का यह फैसला असम कांग्रेस के चुनावी भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। फिलहाल, असम की निगाहें आज होने वाली उस संभावित ‘मुलाकात’ और बोरा के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं, जो राज्य की चुनावी दिशा तय कर सकती है।









