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बांग्लादेश: हिंदू शिक्षक का घर जलाया, यूनुस सरकार के दौर में अल्पसंख्यकों पर ख़तरा गहराया

यूनुस सरकार के दौर में बिगड़ते हालात
यूनुस सरकार के दौर में बिगड़ते हालात

पड़ोसी देश बांग्लादेश से आई एक ताजा और भयावह खबर ने एक बार फिर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक अस्थिरता और सत्ता संघर्ष के बीच अब कट्टरपंथी तत्वों ने सिलहट जिले में एक हिंदू शिक्षक के घर को निशाना बनाया और आग के हवाले कर दिया। परिवार बड़ी मुश्किल से आग की लपटों से बच पाया, लेकिन इस घटना ने इलाके के हिंदू परिवारों में गहरी दहशत पैदा कर दी है।

सिलहट जिले के गोवाइनघाट इलाके में देर रात यह खौफनाक वारदात हुई। पीड़ित शिक्षक का नाम वीरेंद्र कुमार है, जिन्हें पूरे इलाके में ‘झुनू सर’ के नाम से जाना जाता है उनका ‘कसूर’ सिर्फ इतना था कि वे हिंदू समुदाय से आते थे। आरोपों के मुताबिक, देर रात कट्टरपंथी तत्वों ने उनके घर पर हमला किया और पेट्रोल डालकर आग लगा दी। देखते ही देखते पूरा घर आग की चपेट में आ गया।

धुएं की तेज गंध आने पर परिवार के लोगों को अनहोनी का एहसास हुआ। घबराए हुए बच्चे और महिलाएं जलते दरवाजों के बीच से किसी तरह जान बचाकर बाहर निकले। चंद सेकंड की देरी से पूरा परिवार इस आग में जिंदा जल सकता था। जब तक स्थानीय लोग मदद के लिए पहुंचे, तब तक घर राख में तब्दील हो चुका था।

यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों की डरावनी श्रृंखला का नवीनतम अध्याय है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि पिछले 45 दिनों में 15 से अधिक हिंदुओं की हत्याएं हो चुकी हैं। इस हिंसा को लेकर भारत, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गंभीर चिंता जताई गई है, लेकिन मोहम्मद यूनुस की सरकार के दौर में जमीन पर हालात काबू में आते नहीं दिख रहे हैं। न सख्त कार्रवाई हो रही है और न ही दोषियों को पकड़ा जा रहा है। पुलिस जांच की बात कर रही है, लेकिन इस ताज़ा मामले में अब तक न किसी की गिरफ्तारी हुई है और न किसी कट्टरपंथी गुट की पहचान सामने आई है। शिक्षक के घर जलाने की इस घटना के बाद इलाके के कई हिंदू परिवार डर के साये में जीने को मजबूर हैं और अपने घर छोड़ने पर विचार कर रहे हैं।

जब शिक्षक तक सुरक्षित नहीं हैं, तो आम हिंदू परिवारों की सुरक्षा कौन करेगा? यह सवाल बांग्लादेश में गूंज रहा है। जब तक सरकार ठोस कदम नहीं उठाती और दोषियों को सजा नहीं मिलती, तब तक वहां अल्पसंख्यक होना एक बड़े खतरे की पहचान बना रहेगा।

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