बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में आज एक युगांतकारी मोड़ आने वाला है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कद्दावर नेता और अध्यक्ष तारिक रहमान आज प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। लेकिन, सत्ता के इस ऐतिहासिक हस्तांतरण से ठीक पहले, अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने अपने विदाई भाषण में जो तेवर दिखाए हैं, उसने नई दिल्ली और दक्षिण एशिया की कूटनीतिक गलियों में हलचल मचा दी है। यूनुस ने सीधे तौर पर भारत का नाम न लेते हुए भी, पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जो भविष्य के भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए चुनौती खड़ी कर सकता है।
मोहम्मद यूनुस का भाषण मुख्य रूप से तीन भू-राजनीतिक और आंतरिक मुद्दों पर केंद्रित रहा:
1. ‘सेवन सिस्टर्स’ पर यूनुस का विवादित बयान
मोहम्मद यूनुस ने अपने संबोधन में एक बार फिर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (जिन्हें ‘सेवन सिस्टर्स’ कहा जाता है) का मुद्दा छेड़ा। उन्होंने इन राज्यों को ‘पूरी तरह से लैंड-लॉक्ड’ क्षेत्र बताते हुए एक बड़ी भू-राजनीतिक चाल चली। यूनुस ने घोषणा की कि बांग्लादेश इस समूचे क्षेत्र के लिए हिंद महासागर का ‘एकमात्र संरक्षक’ और द्वार है। जानकारों का मानना है कि यह केवल भौगोलिक टिप्पणी नहीं है; यूनुस ने अप्रैल 2025 में अपनी चीन यात्रा के दौरान भी ऐसी ही भाषा का उपयोग किया था, जो भारत की क्षेत्रीय अखंडता के प्रति उनके दृष्टिकोण और चीन के प्रति उनके झुकाव को प्रदर्शित करता है।
2. भारत को दो टूक चेतावनी और संप्रभुता का दावा
यूनुस ने अपने कार्यकाल को ‘आजादी का दूसरा दौर’ बताते हुए पूर्ववर्ती शेख हसीना के शासन को ‘राक्षस’ की संज्ञा दी। उन्होंने भारत का परोक्ष संदर्भ देते हुए स्पष्ट कहा कि “बांग्लादेश अब किसी अन्य देश के निर्देशों या सलाह को मानने वाला अधीन देश नहीं रहा।” उन्होंने गर्व से घोषणा की कि उनका देश अब अपने फैसले खुद लेने में सक्षम है।
दिलचस्प बात यह रही कि जहाँ उन्होंने नेपाल और भूटान का जिक्र बेहद दोस्ताना और सहयोगपूर्ण लहजे में किया, वहीं भारत के लिए उन्होंने ‘सम्मान और हितों के आधार पर संबंध’ की चेतावनी दे डाली। यह कूटनीतिक संकेत साफ है कि नई सरकार भारत के साथ संबंधों की शर्तें बदलने की तैयारी में है।
3. ब्लू इकोनॉमी और रोहिंग्या संकट पर रणनीतिक सलाह
विदाई की बेला में यूनुस ने भावी प्रधानमंत्री तारिक रहमान को रणनीतिक सलाह देते हुए ‘ब्लू इकोनॉमी’ और अंतर्राष्ट्रीय बंदरगाह प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करने को कहा। हालांकि, उन्होंने रोहिंग्या संकट को राष्ट्रीय सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए ‘टाइम बम’ करार दिया। उन्होंने अफसोस जताया कि लंबे समय से इस दिशा में कोई ठोस अंतर्राष्ट्रीय पहल नहीं हुई है, और यह जिम्मेदारी अब तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार के कंधों पर है।
यूनुस के इस तीखे विदाई भाषण ने स्पष्ट कर दिया है कि बांग्लादेश में सत्ता हस्तांतरण के बावजूद, भारत विरोधी भावनाओं को हवा दी जा रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान, यूनुस द्वारा बुने जा रहे इस नए, चुनौतीपूर्ण नैरेटिव का सामना कैसे करते हैं और क्या वे रिश्तों में कोई नई गर्माहट ला पाते हैं।









