काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में हाल ही में हुए छात्र गुटों के हिंसक टकराव ने परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे। अब इस मामले में प्राक्टोरियल बोर्ड की विस्तृत जांच के बाद बड़े खुलासे सामने आए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह झड़प किसी तत्काल हॉस्टल या जातिगत विवाद का नतीजा नहीं थी, बल्कि जन्माष्टमी के दौरान शुरू हुई पुरानी रंजिश के कारण हुई थी, जो बाद में हिंसक रूप ले लिया।
प्राक्टोरियल बोर्ड की जांच में स्पष्ट हुआ है कि यह टकराव दो गुटों के बीच जन्माष्टमी के दिन हुई गंभीर कहासुनी का परिणाम था। इस घटना के दौरान जमकर गाली-गलौच, मारपीट और पत्थरबाजी हुई थी। जांच के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह घोषणा की है कि हॉस्टलों में ‘गेस्ट’ या बाहरी तत्वों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
घायल छात्र की पहचान और हमलावरों का स्टेटस
जांच में घायल छात्र पीयूष कुमार तिवारी से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई है। पीयूष, जिसे पहले रुइया हॉस्टल का छात्र माना जा रहा था, वास्तव में उस हॉस्टल का अंतेवासी नहीं है। वह संस्कृत विद्याधर्म विज्ञान संकाय का पूर्व छात्र है और वर्तमान में एमए संस्कृत की पढ़ाई कर रहा है, लेकिन वह डित्तूपुर में किराए के मकान में रहता है।
पीयूष कुमार तिवारी ने लंका थाने में दी गई तहरीर में बताया कि गुरुवार शाम करीब चार बजे रुइया हॉस्टल परिसर में 30 से 40 नकाबपोश युवक बाइकों से पहुंचे और उन्हें घेर लिया। उन्होंने इसे जान से मारने की सोची-समझी साजिश बताया। पीयूष ने दर्शित पांडेय को मुख्य आरोपी बनाया है, जिस पर लोहे की रॉड से हमला करने का आरोप है, जिससे पीयूष के सिर में छह टांके आए हैं। अन्य सह-आरोपियों में श्वेताभ, अरुण, शशांक सिंह, रोशन मिश्रा, विशाल राय और विश्वजीत यादव का नाम शामिल है।
प्रशासन की कार्रवाई
प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि पीयूष द्वारा पहचाने गए सात हमलावरों में से चार ऐसे बाहरी तत्व हैं, जिन्हें पहले ही विश्वविद्यालय से निष्कासित (डिबार) किया जा चुका है। शेष तीन आरोपी बीएचयू के ही छात्र हैं। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बिड़ला ‘सी’ हॉस्टल में सर्च अभियान चलाया, जहां दो बाहरी छात्रों को पकड़ा गया और उनके कमरे सील कर दिए गए। कुल 11 कमरों को सील किया गया था, जिनमें से जांच के बाद 9 कमरों को फिर से खोल दिया गया है। पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन अब इन डिबार किए गए छात्रों की तलाश में जुटा है, जो परिसर की शांति भंग करने में मुख्य भूमिका निभा रहे थे।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि परिसर की शांति और अनुशासन बनाए रखने के लिए वे किसी भी बाहरी या उपद्रवी तत्व को रियायत नहीं देंगे, और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं।









