नई दिल्ली: भारत में blood donation system को ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए देशव्यापी donor authentication और tracking system लाने की तैयारी पर विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव के तहत रक्तदाताओं की पहचान ABDM/ABHA ID या Aadhaar-linked OTP verification के जरिए करने की बात सामने आई है। इसका उद्देश्य अलग-अलग blood centres पर होने वाले रक्तदान का रिकॉर्ड बेहतर तरीके से जोड़ना और जरूरत पड़ने पर donor की पहचान व follow-up आसान बनाना है।
क्या है पूरा प्रस्ताव?
Drugs Technical Advisory Board यानी DTAB ने अगस्त 2026 में blood donors की mandatory authentication को लेकर सिफारिश की थी। इसके तहत blood centres को सरकारी e-RaktKosh portal से जोड़ने और blood collection, testing तथा issuance से जुड़ा data पोर्टल पर upload करने का प्रस्ताव है।
Donor authentication के लिए दो विकल्प बताए गए हैं—ABDM यानी Ayushman Bharat Digital Mission की ABHA ID या Aadhaar-linked OTP verification। यानी प्रस्ताव में Aadhaar को अकेला माध्यम नहीं बताया गया है।
क्यों लाई जा रही है यह व्यवस्था?
मौजूदा व्यवस्था में अलग-अलग blood centres के records को एक-दूसरे से जोड़ना हमेशा आसान नहीं होता। ऐसे में किसी donor ने पहले किसी दूसरे centre पर blood donation किया है या उसे किसी कारण से temporarily defer किया गया है, इसकी जानकारी हर जगह तुरंत उपलब्ध नहीं हो सकती।
प्रस्तावित digital system का उद्देश्य donor traceability को मजबूत करना है। इससे blood donation के बाद follow-up करने और donor से संबंधित रिकॉर्ड को बेहतर तरीके से maintain करने में मदद मिल सकती है।
High-risk और deferred donors पर भी नजर
इस system का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य ऐसे लोगों को अलग-अलग blood centres पर लगातार donation करने से रोकना है, जिन्हें पहले high-risk या temporarily deferred donor के तौर पर चिन्हित किया गया हो।
अगर अलग-अलग centres का data एक centralized digital system से जुड़ता है, तो donor की previous history को पहचानना आसान हो सकता है। इससे blood safety checks को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
e-RaktKosh से जुड़ेंगे Blood Centres
प्रस्ताव में सिर्फ donor authentication की बात नहीं है। DTAB ने blood centres के लिए e-RaktKosh portal पर registration और data uploading को भी जरूरी बनाने की सिफारिश की है।
इस व्यवस्था में blood collection, testing और blood issuance से संबंधित information portal पर उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इसका मकसद देशभर के blood centres से जुड़े records को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध कराना है।
प्रस्ताव की शुरुआत कहां से हुई?
इस व्यवस्था पर चर्चा सीधे DTAB से शुरू नहीं हुई थी। मामला पहले Drugs Consultative Committee (DCC) की 24 जून 2026 को हुई बैठक में सामने आया था।
इसके बाद donor authentication के तरीके पर विचार करने के लिए एक sub-committee की सिफारिश की गई। इसी प्रक्रिया में ABDM/ABHA ID या Aadhaar-linked OTP verification को donor traceability और follow-up के लिए सुझाया गया। बाद में इस प्रस्ताव को DTAB के सामने रखा गया।
किन मरीजों के लिए हो सकता है फायदा?
सुरक्षित और traceable blood donation system खास तौर पर उन मरीजों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है जिन्हें नियमित blood transfusion की जरूरत होती है। इनमें thalassemia और sickle cell disease से जूझ रहे मरीज भी शामिल हैं।
ऐसे मरीजों के लिए blood safety और transfusion व्यवस्था में consistency काफी महत्वपूर्ण होती है। Donor records को बेहतर तरीके से track करने से blood safety monitoring को मजबूत करने की कोशिश की जा सकती है।
अभी लागू नहीं हुआ है सिस्टम
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह फिलहाल प्रस्ताव और regulatory recommendation के स्तर पर है। उपलब्ध रिपोर्टों में इसे देशभर में लागू हो चुका नया नियम नहीं बताया गया है।
DTAB ने Drugs Rules, 1945 में आवश्यक बदलाव करने की सिफारिश की है। आगे regulatory process पूरा होने के बाद ही इसकी वास्तविक implementation की स्थिति स्पष्ट होगी।
क्या बदलेगा?
अगर प्रस्ताव आगे लागू होता है, तो broadly तीन बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं:
- Blood centres का e-RaktKosh registration अनिवार्य हो सकता है।
- Blood collection, testing और issuance का data digital portal पर upload किया जा सकता है।
- Donors की authentication ABHA/ABDM ID या Aadhaar-linked OTP के जरिए की जा सकती है।
इसका लक्ष्य देश में blood donation records को ज्यादा connected, traceable और follow-up friendly बनाना है। हालांकि अंतिम व्यवस्था और इसके implementation rules आगे होने वाले regulatory decisions पर निर्भर करेंगे।