BRICS रवाना होते ही ईरान ने ट्रंप पर साधा निशाना, भारत की तारीफ में पेजेश्कियान बोले- डॉलर पर…..।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए शुक्रवार को तेहरान से नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए। भारत में होने वाले इस सम्मेलन से पहले उन्होंने BRICS को वैश्विक स्तर पर एकतरफा नीतियों का मुकाबला करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने का अहम मंच बताया।
BRICS रवाना होते ही ईरान का ट्रंप पर निशाना
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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए शुक्रवार को तेहरान से नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए। भारत में होने वाले इस सम्मेलन से पहले उन्होंने BRICS को वैश्विक स्तर पर एकतरफा नीतियों का मुकाबला करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने का अहम मंच बताया। इस दौरान उन्होंने भारत के साथ ईरान के पुराने संबंधों और दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाओं का भी जिक्र किया।

‘एकतरफा रवैये का मुकाबला करना BRICS का मकसद’

भारत रवाना होने से पहले पेजेश्कियान ने कहा कि BRICS के पास आर्थिक, व्यापारिक, औद्योगिक और वैज्ञानिक सहयोग को बढ़ाने की बड़ी क्षमता है। उनके मुताबिक, BRICS के सदस्य देश दुनिया की 45 प्रतिशत से ज्यादा आबादी और करीब 35 प्रतिशत भूमि का प्रतिनिधित्व करते हैं। पेजेश्कियान ने कहा, “BRICS का मुख्य मकसद एकतरफा रवैये का मुकाबला करना है। देशों को अपनी स्वतंत्रता बनाए रखते हुए आर्थिक और व्यापारिक संबंध विकसित करने की कोशिश करनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि इस साल के BRICS सम्मेलन का फोकस एकजुटता, स्थिरता, प्रतिरोध और इनोवेशन जैसे मुद्दों पर है।

डॉलर की निर्भरता कम करने पर जोर

ईरानी राष्ट्रपति ने आर्थिक लेनदेन में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने BRICS बैंक के जरिए सदस्य देशों के बीच निवेश और आर्थिक गतिविधियों को आसान बनाने की बात कही। पेजेश्कियान ने कहा, “कोशिश यह है कि देश डॉलर पर निर्भर हुए बिना आर्थिक और क्षेत्रीय रूप से विकास करें और एकतरफा फैसलों तथा बड़ी ताकतों की हद से ज्यादा मांगों का विरोध करें।” उनके इस बयान को अमेरिकी नीतियों, खासकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली अमेरिकी आर्थिक और व्यापारिक नीतियों पर अप्रत्यक्ष निशाने के तौर पर देखा जा रहा है।

भारत की जमकर तारीफ

नई दिल्ली में होने वाले BRICS सम्मेलन को ईरान ने भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के मौके के तौर पर भी देखा है। पेजेश्कियान ने भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों और साझा सांस्कृतिक विरासत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि– भारत और ईरान के बीच सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं। पेजेश्कियान ने कहा कि BRICS सम्मेलन में चीन, रूस, ब्राजील, भारत और अन्य क्षेत्रीय देशों के नेताओं की मौजूदगी से द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बातचीत को आगे बढ़ाने का अच्छा अवसर मिलेगा।

BRICS को मजबूत करने की जरूरत

जब पेजेश्कियान से पूछा गया कि एकतरफा नीतियों के खिलाफ BRICS कितना प्रभावी साबित हो सकता है, तो उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस समूह का गठन किया गया था। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था लगातार जटिल होती जा रही है और पिछले कुछ वर्षों में कुछ शक्तियों का अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर प्रभाव बढ़ा है। ऐसे में नए तरीकों से सहयोग बढ़ाने की जरूरत है।

पेजेश्कियान ने कहा, “सदस्य देशों के बीच इनोवेशन और सहयोग बढ़ाने से BRICS को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय सिस्टम में एकतरफा रवैये को कम करने में मदद मिल सकती है।”

BRICS में ईरान की बढ़ती भूमिका

ईरान के लिए BRICS का महत्व सिर्फ आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है। समूह के जरिए वह व्यापार, निवेश और वित्तीय लेनदेन के लिए नए विकल्प तलाशना चाहता है। डॉलर पर निर्भरता कम करने और सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने की चर्चा भी इसी दिशा का हिस्सा है।

नई दिल्ली में होने वाला BRICS सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक तनाव जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में हैं। ऐसे में ईरान का रुख और भारत के साथ उसके संबंध सम्मेलन के दौरान अहम चर्चा का विषय बन सकते हैं।

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