कोलकाता: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने दोनों गुटों के लिए नए नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए हैं। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न दिया गया है। वहीं, ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न मिला है। ये व्यवस्था फिलहाल 6 अक्टूबर को होने वाले पश्चिम बंगाल उपचुनावों के लिए लागू होगी।
CJP ने ‘लिफाफा’ सिंबल पर कसा तंज
चुनाव आयोग के फैसले के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी गुट को मिले ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न पर तंज कसते हुए लिखा, “‘Envelope’ symbol for TMC defectors. Envelope mein bharr ke kya aaya tha? The jokes just write themselves in this country.”
सौरव दास ने इससे पहले भी चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाए थे। ये उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक प्रतिक्रिया है।
चुनाव आयोग ने क्या फैसला दिया?
चुनाव आयोग ने गुरुवार देर रात अंतरिम आदेश जारी कर दोनों गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के मूल ‘फूल और घास’ (Jora Ghash Phul) चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया था। दोनों गुटों से शुक्रवार सुबह तक नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प मांगे गए थे।
इसके बाद शुक्रवार को आयोग ने दोनों गुटों के लिए नए नाम और चिह्न को मंजूरी दी। आयोग ने स्पष्ट किया कि ये व्यवस्था आगामी उपचुनावों के लिए है और मूल पार्टी के नाम व चुनाव चिह्न पर विवाद का अंतिम फैसला इससे अलग प्रक्रिया में होगा।
अब दोनों गुटों की क्या पहचान होगी?
चुनाव आयोग के आदेश के अनुसार:
- ममता बनर्जी गुट: ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ — फुटबॉल खिलाड़ी चुनाव चिह्न
- ऋतब्रत बनर्जी गुट: ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ — लिफाफा चुनाव चिह्न
दोनों नाम और चिह्न फिलहाल आगामी उपचुनावों के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे।
कब होंगे पश्चिम बंगाल के उपचुनाव?
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होंगे। वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को की जाएगी।
ममता बनर्जी ने फैसले पर क्या कहा?
चुनाव आयोग के फैसले पर ममता बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे ‘असंवैधानिक’, ‘गैरकानूनी’ और राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। ममता ने कहा कि वह संवैधानिक पद का सम्मान करती हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि यह दिन लोकतांत्रिक इतिहास में ‘काला दिन’ है।
ममता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का फैसला राजनीतिक रूप से सुनियोजित हस्तक्षेप का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को अपनी सीमाएं समझनी चाहिए, क्योंकि सत्ता हमेशा एक जैसी नहीं रहती। ये आरोप ममता बनर्जी की ओर से लगाए गए हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
TMC के नाम और सिंबल पर विवाद क्या है?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस में दो गुटों के बीच संगठन और पार्टी की पहचान को लेकर विवाद बढ़ा। मामला चुनाव आयोग तक पहुंचने के बाद आयोग ने अंतरिम तौर पर मूल पार्टी का नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया। इसके बाद दोनों गुटों से वैकल्पिक नाम और चिह्न मांगे गए।
अब आगामी उपचुनावों में दोनों गुट अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ मैदान में उतरेंगे। मूल TMC नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।


